• Mon. Aug 31st, 2026

मंत्री जी मुख्यमंत्री जी इन्वेस्टर मीट की बधाई, लेकिन भू राजस्व संहिता की भोगली बनाने वाले अधिकारियों का इलाज भी कीजिए, ना खाता ना बही सोनकर कहे वही सही कब तक चलेगा।

BySurendra Jain

Jun 26, 2025

खबर पक्की : 26 जून रतलाम, रतलाम ग्रामीण एसडीएम विवेक सोनकर को रतलाम ग्रामीण की एसडीएम शिप से तहसीलदारी ज्यादा पसंद है। इसलिए राज्य शासन को चाहिए कि उन्हें एसडीएम के पद से हटा कर पुनः तहसीलदार पद पर ही वापस भेज दिया जाए। जी हां उनकी पूरी कार्यप्रणाली से ऐसा ही प्रतीत होता है। उनके क्षेत्राधिकार में आने वाली सारी तहसीलों में उनके कारण सारे राजस्व मामलों में बगैर गांधी छाप पेपर वेट के कोई मामला हल नहीं होता।ताजा मामला इस प्रकार है कि ग्राम पंचेड़ की   लाल सिंह कोठारी के नाम की  चार सर्वे नंबरों की 20 हेक्टेयर 560 पॉइंट भूमि के कुल चार वारिस थे। इसमें से दो वारिस राज सिंह  अविवाहित होने से उनका कोई वारिस नहीं था और  इसी तरह खुमान सिंह और उनकी पत्नी विजय कुंवर भी बेऔलाद स्वर्गवासी हो गए।  राज सिंह और खुमान सिंह के उनके हिस्से की 10 हैकटेयर 360 पॉइंट जमीन पर बाकी दोनों वारिसों भभूत सिंह और मदन सिंह की औलाद के नाम चढ़ना चाहिए। किन्तु भभूत सिंह की औलाद मदन सिंह की औलाद के नाम चढ़ाने का विरोध कर रही है। और उन्होंने तहसीलदार नामली  के यहां लेन देन येन केन प्रकारेण नामांतरण आवेदन खारिज करवा दिया। इस पर मदन सिंह की औलाद मुकेश और राजकुमारी ने एसडीएम रतलाम ग्रामीण विवेक सोनकर के यहां अपने अभिभाषक अग्रवाल के माध्यम से अपील की। एसडीएम विवेक सोनकर ने पाया कि मामला एक दो बीघा का नहीं 100 बीघा जमीन का है तो सबके फायदे में अपना फायदा लिहाजा उन्होंने अपील स्वीकार कर मदन सिंह के वारिसों राजकुमारी और मुकेश कोठारी का नाम चढ़ाने का आदेश कर दिया। उक्त आदेश 24 दिसंबर 2024 को किया गया। उक्त आदेश के पालन में फरवरी 2025 के द्वितीय सप्ताह में   11 फरवरी को पटवारी विनोद द्वारा एसडीएम के आदेश का पालन करते हुए मुकेश कोठारी और राजकुमारी का नाम खसरे में दर्ज कर दिया गया। यहा उल्लेखनीय है कि 24 दिसंबर 24 के sdm के आदेश के विरुद्ध भभूत सिंह की औलाद  ने उज्जैन कमिश्नर के यहां अपील की उस वक्त कमिश्नर की सीट खाली होने से उसके द्वारा हाईकोर्ट में अपील की गई कि जब तक कमिश्नरी में सुनवाई  हो और स्टे मिले तब तक आप स्टे दीजिए। इस पर हाई कोर्ट द्वारा कमिश्नर के आदेश पारित करने तक के लिए स्टे दिया गया। बाद में कमिश्नर द्वारा उक्त अपील को खारिज कर दिया गया। कमिश्नर के यहां अपील खारिज होने की कॉपी देने पर हाई कोर्ट द्वारा भी उक्त अपील को 5 मई 2025 को खारिज कर दिया गया। इस प्रकार पूरा मामला मुकेश कोठारी के पक्ष में हो गया। किंतु इस बीच sdm के आदेश के पालन में मुकेश और राजकुमारी का नाम खसरे में चढ़ चुका था। और यह बात sdm को भी पता थी कि उनके आदेश का पालन हो गया है। लेकिन भभूत सिंह के वारिसों ने sdm को हाई कोर्ट में लगाई जाने वाली अवमानना याचिका की कापी दिखाई की  यह हम आपके खिलाफ लगाने जा रहे हैं कुछ करना है तो कर लो तो जो  याचिका हाई कोर्ट में अस्वच्छ हाथों से 7 मार्च को पंजीकृत हुई उस याचिका की कापी  देख कर एसडीएम ने गेम प्लान बनाते  हुए अपने हीं आदेश पर चढ़ाए गए नाम को खसरे से हटाने का मामला तय कर भभूत सिंह के वारिसों से दुरभि संधि कर ली और अपने  हितों को साधते हुए याचिका लगने के पूर्व ही नायब तहसीलदार और पटवारी को अपने ऑफिस में बुलाया और जो याचिका अभी कोर्ट में प्रस्तुत भी नहीं हुई थी उसका डर दिखाते हुए  अपने ही अमल किए आदेश के तारतम्य में चढ़े मुकेश और राजकुमारी के नाम को पटवारी विनोद को  धौंस दपट देते हुए गैर कानूनी तरीके से पुन: 18 फरवरी 2024 को बगैर पक्ष कारों को सुनवाई  का अवसर देते हुवे खसरे से हटवा दिया यह बात खुद पटवारी विनोद ने खबर पक्की से चर्चा करते हुए स्वीकार की, की नाम हटाने के लिए उसे कोई लिखित आदेश नहीं दिया गया। यह सिर्फ और सिर्फ एसडीएम साहब के दबाव में की गई कार्रवाई है। जब के खसरे में साफ लिखा हुआ आ रहा है कि उक्त अमल दरामद के बाद वह जमीन किसी और को बेच दी गई है मतलब उस खरीदार के साथ कितना बड़ा धोखा और भरोसे की हत्या राजस्व विभाग द्वारा कि गई  की राजस्व रिकॉर्ड अर्थात खसरे  में मुकेश कोठारी का नाम देखने के बाद मुकेश कोठारी से उसने जमीन खरीद कर रजिस्ट्री करवाई उस मुकेश कोठारी का नाम बगैर किसी आदेश के राजस्व रिकार्ड से हटा दिया गया और नायब तहसीलदार मैडम अश्विनी गोहिया बेबसी के साथ अपने अधिकार क्षेत्र में होती इस दखलअंदाजी  और गैरकानूनी काम को होते हुए देखती रही। sdm विवेक सोनकर के मातहत कार्य कर रहे सभी नायब तहसीलदारों राजस्व अधिकारी  पटवारी का एक सुर में कहना है कि यह अनावश्यक दबाव बनाते हैं वहीं कई अभिभाषकों का कहना है कि इनकी कोर्ट की सुनवाई में प्रकरण लगते ही सुनवाई तो तुरत फुरत शुरू हो जाती है और जल्दी-जल्दी तारीखें दी जाती है लेकिन सुनवाई पूरी होने के बाद केस आदेश पर लगने के उपरांत हफ्ते और महीना तक आदेश जारी नहीं किए जाते।अगर कलेक्टर इनकी कोर्ट के केसों की जांच करें तो पता चलेगा कि ऐसी ढेरों फाइल है जिनमें आदेश पर लगने के बाद 15 दिन महीने भर बाद भी आदेश नहीं हुआ है और यही सब भ्रष्टाचार का कारण है। लोकायुक्त अगर इनकी तफसील से जांच करें तो उसके भी होश उड़ जाएंगे।पंचेड के इस प्रकरण में एसडीएम विवेक सोनकर ने यह बता दिया कि लोगों के भरोसे की हत्या में उन्हें महारथ हासिल है यानी राजस्व विभाग में चित भी मेरी पट भी मेरी और खड़ा सिक्का भी मेरा, हे कोई माई का लाल। इस  नामांतरण प्रकरण मैं हुई गड़बड़  की जानकारी भाजपा जिला अध्यक्ष प्रदीप उपाध्याय द्वारा कलेक्टर महोदय को दी गई है। उम्मीद है राजस्व विभाग द्वारा लोगों के भरोसे की, की गई हत्या के इस पूरे प्रकरण में कलेक्टर जल्द ही न्यायपूर्ण कार्रवाई करते हुए दूध का दूध पानी का पानी करेंगे। और राजस्व विभाग में जनता के कम होते भरोसे को बहाल करेंगे। जब तक भू राजस्व संहिता को अपने निजी स्वार्थ के चलते भोगली बनाने वाले ऐसे अधिकारियों पर नकेल नहीं कसी जाएगी कोई भी इन्वेस्टर, इन्वेस्ट करना पसंद नहीं करेगा।

error: Content is protected !!