नामली। नामली नगर पंचायत के मुख्य नगर पंचायत अधिकारी अरुण ओझा की योग्यता पर प्रश्नचिन्ह खड़े हो रहे है। साथ ही नगर पंचायत अध्यक्ष नरेंद्र सोनगरा भी सवालों के घेरे में है। मामला कुछ यूं है कि 5 जून 2018 के दैनिक भास्कर में नगर पंचायत नामली द्वारा एक विज्ञप्ति प्रकाशित करवाई गई है। जिसमें वार्ड क्रमांक 11 की 15 दुकानों की नीलामी के लिए सार्वजनिक नीलामी आमंत्रित की गई है। इस नीलामी में भाग लेने के लिए बोली कर्ता को रुपए 100000 जमा कराना है। इस हेतु नगर पंचायत नामली के बैंक ऑफ इंडिया, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, सेंट्रल बैंक, यूनियन बैंक के खाता नंबर और आईएफएससी कोड सार्वजनिक रूप से विज्ञप्ति में प्रकाशित किए गए है बताया गया है कि इन खातों में आप डायरेक्ट एक लाख रुपया जमा कर दें। विज्ञप्ति में कहीं भी उल्लेखित नहीं है कि पैसा ट्रांसफर करना है आरटीजीएस करना है या किस तरह जमा करना है। यदि किसी व्यक्ति ने अपने पैन नंबर से नगद पैसा नगर परिषद के खाते में डाल दिया तो वर्तमान आयकर कानून के मुताबिक पैसा नगद जमा कराने वाले व नगद पैसा लेने वाले नगर पंचायत दोनों पर शत प्रतिशत पेनल्टी आरोपित की जा सकती है। यही नहीं आए दिन अखबार में टीवी चैनल में सोशल मीडिया पर रिजर्व बैंक व अन्य बैंके रोज बता रही है कि अपना बैंक खाता नंबर व अन्य जानकारी किसी को भी नहीं दे अगर आप किसी को यह जानकारी देगे तो हो सकता है। आपके साथ धोखा हो जाए और आपका बैंक खाता खाली हो जाए किंतु लगता है नगर पंचायत नामली के जिम्मेदार अधिकारियों और नेताओं का दिमागी दिवाला निकल गया है तभी तो उन्होंने अपने बैंक खातो के नंबर और आईएफएससी कोड सार्वजनिक कर दिया है इन खातों से कल से कोई साइबर धोखाधड़ी होती है और नगर पंचायत नामली को नुकसान पहुंचता है तो जिम्मेदार कौन होगा यह विचारणीय प्रश्न है क्योंकि धोखाधड़ी के लिए आप खुद ही उनको नंबर देकर आमंत्रित कर रहे हो।
