खबर पक्की, 19 सितंबर, रतलाम। बारिश का सिस्टम बना हुआ है। शनिवार सुबह कुछ देर तक रिमझिम बारिश हुई। बादलों की ओट में सूरज की लुकाछिपी जारी रही। अब तक जिले में 23 इंच बारिश हो चुकी है, जो पिछले साल की तुलना में 24.43 इंच कम है। गत वर्ष इस समय तक 47.43 इंच बारिश हो चुकी थी। धोलावाड़ डेम को पूरा भरने के लिए भी एक साथ करीब 5 इंच मूसलाधार बारिश की जरूरत है।
पिछले 24 घंटे में शनिवार सुबह 8 बजे तक रतलाम जिले में 15.50 मिमी बारिश दर्ज की गई। इसमें सबसे ज्यादा ताल में 26 मिमी बारिश हुई। इसके बाद आलोट में 19, पिपलौदा में 16, रतलाम शहर में 14, जावरा में 13, सैलाना में 13 और रावटी में 12 मिमी बारिश दर्ज की गई।
अब तक हुई बारिश से जिले की नदियों और कुओं में पानी आ गया है, लेकिन जलस्रोतों में अभी अपेक्षित स्तर तक पानी नहीं पहुंचा है।
मानसूनी सीजन समाप्त होने में अब 11 दिन शेष
मौसम विभाग के अनुसार मानसूनी सीजन समाप्त होने में अब 11 दिन शेष हैं। आखिरी सप्ताह में कुछ जिलों में भारी बारिश होने की संभावना है। ऐसे में प्रदेश में बारिश का कोटा पूरा होने की उम्मीद है।
हालांकि, उज्जैन संभाग के जिलों में सामान्य बारिश का आंकड़ा कम रहने की संभावना है। रतलाम में अब तक सामान्य बारिश का करीब 80 प्रतिशत ही पानी बरसा है। अगले तीन से चार दिन में अगर भारी बारिश होती है तो जिले में सामान्य बारिश के आंकड़े तक पहुंचा जा सकता है।
अगले 4 दिन हल्की बारिश का अनुमान
मौसम विभाग ने अगले चार दिन यानी 22 सितंबर तक प्रदेश में हल्की बारिश होने का अनुमान जताया है। मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक ने बताया कि इस समय पश्चिमी हिस्से में एक चक्रवाती परिसंचरण तंत्र सक्रिय है। इसके प्रभाव से पश्चिमी हिस्से के जिलों में बारिश का दौर बना हुआ है।
19 सितंबर की शाम के आसपास उत्तर अंडमान सागर में नया निम्न दबाव क्षेत्र बनने की संभावना है। इसके बाद इसके दक्षिण ओडिशा और उत्तर आंध्र प्रदेश तट की ओर पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में बढऩे के संकेत हैं। इस सिस्टम के प्रभाव से मध्यप्रदेश के मौसम में एक बार फिर बदलाव होने की संभावना है।
धोलावाड़ डेम भी खाली
रतलाम शहर में पेयजल का मुख्य स्रोत धोलावाड़ डेम है। डेम का जलस्तर अभी अधिकतम जलस्तर से करीब 5.30 मीटर नीचे है। अब तक धोलावाड़ डेम में 366 मिमी बारिश के बाद 23.05 मिलियन क्यूबिक मीटर (एमसीएम) पानी जमा हो पाया है, जबकि इस समय तक 49.95 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी का स्टोरेज होना चाहिए।
डेम में मौजूद 23.05 एमसीएम पानी में से 18 एमसीएम पेयजल के लिए रिजर्व रहेगा, जबकि 5 एमसीएम पानी सिंचाई के लिए रखना होगा। ऐसे में अगर आगे पर्याप्त बारिश नहीं होती है तो पेयजल और सिंचाई के लिए परेशानी हो सकती है।
पीएचई के एसडीओ आरएस मीणा ने बताया कि डेम का अधिकतम जलस्तर 395 मीटर है। शनिवार सुबह तक जलस्तर 389.70 मीटर पहुंचा है। इस बार डेम में पानी 50 प्रतिशत के आंकड़े तक भी नहीं पहुंच पाया है। अधिकतम जलस्तर तक पहुंचने और डेम को पूरा भरने के लिए अभी करीब 5 इंच मूसलाधार बारिश की जरूरत है।
रतलाम में 23 इंच गिरा पानी, पिछले साल से आधा : धोलावाड़ डेम पूरा भरने 5 इंच बारिश की जरूरत, मानसूनी सीजन का आखरी दौर
