रतलाम। नर्मदा आंदोलन की प्रणेयता मेघा पाटकर ने चर्चा में बताया कि किसान आंदोलन की पहली बरसी पर बुढ़ा गांव में एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन कर किया गया तथा 6 जून को उपवास रखकर शहीद किसान को श्रद्धांजलि दी जाएगी। किसानों को उनकी हक का दाम मिलना चाहिए। जब तक जीवन प्रणाली को नहीं बचाया जाएगा तब तक विकास की अवधारणा नहीं की जा सकती। मेघा पाटकर ने कहा कि आज नर्मदा मौत की कगार पर है। नर्मदा बचाने के लिए हजारों लोगों ने आंदोलन किया। लेकिन मप्र सरकार ने मप्र के हितों को ताक में रखकर गुजरात को पानी दिया और मप्र के कई गांव डुब में आ चुके है। हजारों हैक्टर वन कर चुके है अवैध रेत का खनन चर्म सीमा पर जारी है। नर्मदा का राजनीतिकरण दिया है तथा नर्मदा के नाम पर करोड़ों रुपया खर्च किया गया है। 674 करोड़ रुपया वृक्षारोपण के नाम पर खर्च हुआ है लेकिन आज एक भी पौधा जिंदा नहीं है। नर्मदा के राजनीतिकरण और खर्च को लेकर पोल खोली जाएगी। नर्मदा बचाओं के तहत मई माह में एक हजार लोगों ने खलघाट से भरुच तक पैदल यात्रा की है और कई जगह पाया गया है कि नर्मदा अनेक स्थानों पर सुख चुकी है। 152 गांव डूब में आएं है। क्षिप्रा, नर्मदा लिंक योजना का लाभ उज्जैन के पास उदयन नगरी बस रही है उसे पानी देने की योजना है। मनमाने तरीके से नदियों को जोड़कर पर्यावरण बिगाड़ा जा रहा है। पर्यावरण साधनों की खुली लूट हो रही है। यदि इसी तरह लूट जारी रही तो नर्मदा खत्म हो जाएगी।
मेघा पाटकर ने कहा कि किसान आंदोलन किसानों को उपज का उचित मूल्य मिले तथा ऋण मुक्ति के लिए हो रहा है। वन उपज किसानों की उपज, टीन का दाम डेढ़ गुना किया जाना चाहिए। किसानों को उनकी स्वयं का लाभ मिलना चाहिए। इसलिए हमने गेहूं की कीमत 3 हजार रुपए क्विंटल, सोयाबीन की कीमत 10 हजार रुपए क्विंटल सहित कई फसलों फल, सब्जी आदि के दाम भी तय किए गए है। केवल जुमले बाजी से किसानों का भला नहीं हो सकता। किसान आंदोलन के तहत जिन किसानों पर आपराधिक प्रकरण दायर किए है उन्हें वापस लिये जाएं।
मध्यप्रदेश के हक पर गुजरात को पानी : मेघा पाटकर
