रतलाम। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के जिले में विकास यात्रा लेकर आने से ठीक एक दिन पहले रतलाम जिला भाजपा में एक बाहरी नेता के कारण नया विवाद शुरू हो गया है। इस विवाद के बाद पूर्व मंत्री और प्रदेश के कद्दावर भाजपा नेता हिम्मत कोठारी मंगलवार सुबह भोपाल रवाना हो गए। जिस बाहरी नेता के कारण यह विवाद हुआ उनका राजनीति में कोठारी के सामने बहुत छोटा कद है, इसके बावजूद भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की आड़ लेकर कोठारी के गृह नगर रतलाम में ही उन्हें एक कार्यक्रम से दरकिनार कर दिया गया।
मामला, मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना की गोल्डन जुबली का है। दरअसल, भाजपा प्रदेश संगठन ने सीएम जनकल्याण प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक और रीवा के भाजपा नेता रामगोपाल चारी ने रतलाम रेल्वे स्टेशन पर रामेश्वरम तीर्थ यात्रा पर जाने वाले यात्रियों के स्वागत का कार्यक्रम आयोजित किया गया था। यह कार्यक्रम केवल रतलाम में ही, मुख्यमंत्री के आगमन से ठीक एक दिन पहले ही क्यों आयोजित किया गया यह भी शहर में खासी चर्चा का विषय है। एक दिन बाद खुद मुख्यमंत्री जावरा में जिले भर के 14 प्रमुख योजनाओं के हितग्राहियों को सम्मानित करेंगे, जिसमें मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन यात्रा योजना भी शामिल है।
अब बात ताजा विवाद की, रामगोपाल चारी सोमवार रात रतलाम पहुंचे, कुछ स्थानीय लोगों के साथ कार्यक्रम की रूपरेखा और अतिथियों की लिस्ट तय की। मंगलवार सुबह 11 बजे प्रस्तावित कार्यक्रम में बतौर अतिथि राज्य योजना आयोग उपाध्यक्ष चेतन्य काश्यप, सासंद सुधीर गुप्ता, प्रदेश महामंत्री बंशीलाल गुर्जर, महापौर डा. सुनीता यार्दे और भाजपा जिला अध्यक्ष कान्हसिंह चौहान के नाम तय किए गए। रतलाम शहर में ही आयोजन होने के बावजूद अतिथियों की लिस्ट में कहीं राज्य वित्त आयोग अध्यक्ष हिम्मत कोठारी का नाम नहीं था। देर रात करीब 11 बजे सर्किट हाउस पर कोठारी के समर्थक और भाजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य, एल्डरमेन प्रभु नेका, भाजपा सांस्कृतिक प्रकोष्ठ जिला संयोजक मधु शिरोडकर की इस मुद्दे पर रामगोपाल चारी से खासी बहस भी हो गई। नेका और शिरोडकर ही रतलाम में अब तक मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना में पार्टी की ओर से अहम सहयोगी रहे है। विवाद बड़ता देख चारी ने प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान का हवाला दिया। इस पर मधु शिरोडकर भड़क उठे व प्रदेश अध्यक्ष को ही सीधे फोन लगाने लगे। चारी ने हाथ पकड़ा, फोन लगाने से मना किया। कहा- मेरी बात समझो, इस बात को आगे मत बढ़ाओ। 49 यात्राओं की व्यवस्था में शामिल रहे और प्रदेशस्तर पर केवल इसी मामले में दो पुरूस्कार पाने वाले इन दोनों ही नेताओं ने आयोजन से दूरी बना ली।
इस विवाद की जानकारी देर रात ही हिम्मत कोठारी को भी लगी, वे भी खासे नाराज हुए। इस कार्यक्रम के आयोजन से पहले वे खुद मंगलवार सुबह ही रतलाम से भोपाल के लिए रवाना हो गए। बाहरी नेता के कारण स्थानीय स्तर पर हुआ यह विवाद आगे क्या रंग लाएगा, कुछ दिन बाद ही तय हो पाएगा।
