रतलाम। जिला न्यायालय ने श्री बरबड़ हनुमान मंदिर और उसकी संपत्तियों के संबंध में फैसला दे दिया है। मंदिर और इससे जुड़ी सम्पत्ति का स्वामित्व श्री हनुमानजी का बड़ा मंदिर देवस्थान न्यास पंजीकृत लोकन्यास बरबड़ रतलाम का माना गया है। मंदिर के पुजारी को कमरे खाली करने और वाद प्रस्तुत करने की तिथि से उसका किराया अदा करने के आदेश दिए गए है। पुजारी को मंदिर में आने वाला चढ़ावा भी क्षतिपूर्ति के रूप में ट्रस्ट को देना होगा।
रविवार को मंदिर ट्रस्ट ने पत्रकारवार्ता आयोजित कर तृतीय अपर जिला न्यायाधीश ए.के. सक्सेना द्वारा दिए गए फैसले की जानकारी दी। ट्रस्ट के अनुसार न्यायालय ने मंदिर और उसकी समस्त सम्पत्ति को ट्रस्ट का माना हैै। पुजारी को मंदिर परिसर में बने कमरे खाली करने और न्यास को आधिपत्य देने का आदेश देते हुए कमरे का किराया वाद प्रस्तुति दिनांक से प्रतिमाह 1 हजार रूपए के हिसाब से देने के लिए कहा है। पुजारी को वाद प्रस्तुत करने की तिथि से मंदिर में आए चढ़ावे और दान की हानि की क्षतिपूर्ति करने हेतु प्रतिमाह 3 हजार रूपए भी न्यास में देने के आदेश दिए गए है।
प्रशासन से जुड़े एक अन्य फैसले में न्यायालय ने मंदिर एवं उसकी सम्पत्ति को ट्रस्ट की घोषित करते हुए राजस्व रिकॉर्ड से व्यवस्थापक के रूप में जिलाधीश का नाम हटाने एवं ट्रस्ट का नाम दर्ज करने के आदेश दिए है। न्यायालय ने प्रशासन को मंदिर की व्यवस्था के संबंध में किसी प्रकार का हस्तक्षेप और पुजारी की नियुक्ति के साथ अन्य कार्य करने पर भी रोक लगा दी है। पत्रकारवार्ता में ट्रस्ट अध्यक्ष कन्हैयालाल सारडा, सचिव मधुकान्त पुरोहित, कोषाध्यक्ष शांतिलाल चौधरी व अन्य न्यासीगण के साथ पार्षद प्रहलाद पटेल भी उपस्थित थे। उन्होंने बताया कि मंदिर का नवनिर्माण कार्य किया जा रहा है। नवनिर्माण की प्रारंभिक लागत 4 करोड़ रूपए है,लेकिन करीब 8 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। ट्रस्ट द्वारा निर्माण शुरू करने पर पुजारी कृष्णदास बैरागी ने विवाद कर मंदिर को अपना बताया था। उसने मंदिर के व्यवस्थापक के रूप में कलेक्टर को दर्ज करवाया था,जिसपर ट्रस्ट ने न्यायालय में वाद दायर कर स्वत्व घोषित करने की मांग की थी।
