खबर पक्की : 6 सितंबर रतलाम, कल द्वारका रेजिडेंसी से संबंधित तथ्यात्मक खबर का पाठको और जनता से बेहतर प्रतिसाद मिलने के बाद खबर पक्की यह स्पष्ट करना जरूरी समझता है कि उसे इस खबर को लिखने की प्रेरणा कहां से मिली l माननीय उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस चंद्रचूड़ ने एक कार्यक्रम में जब अपने उद्बोधन में कहा कि सच जानने के लिए सिर्फ राज्य पर निर्भर नहीं रहा जा सकता क्योंकि सरकार और प्रशासन में बैठे लोगों के इर्द-गिर्द ऐसे लोगों का जमावड़ा हो जाता है जो सिर्फ उनकी हां में हां मिलाते हैं और सच बताने की हिम्मत नहीं करते l जब सारा प्रिंट मीडिया लगातार प्रशासन का पक्ष छापते हुए हुए इसके प्रमोटर को सूली पर चढ़ा रहा था तब मुझे अपने मित्र नवीन व्यास के पिता जी मदन मोहन के शब्द याद आ रहे थे कि बहाव के साथ तो मुर्दे बहते हैं l मई के महीने में जब कोरोना महामारी अपने चरम पर थी और धड़ाधड़ लोग मर रहे थे ऐसे में कलेक्टर कुमार पुरुषोत्तम ने अपने कुशल नेतृत्व से जिस खूबी के साथ इस महामारी पर काबू पाया था और जनता और मुख्यमंत्री से जिस तरह से प्रतिष्ठा और प्रशंसा अर्जित की थी इसे देखते हुए उनसे ऐसी गलती की उम्मीद नहीं की जा सकती थी l लेकिन सफलता के आभामंडल में सभी लगभग सभी उनकी हां में हां मिलाने में जुटे हुए थे और कोई उन्हें सच बताने की जहमत नहीं उठा रहा था l वहीं कुछ अफसरों और जनता के लोगों से ऐसी खबरें मिल रही थी कि कलेक्टर की इस कार्रवाई से द्वारका रेजिडेंसी का प्रमोटर कहीं आत्महत्या ना कर ले तो खबर पक्की ने कलेक्टर को सच बताने का बीड़ा उठाया कि अगर द्वारका रेजिडेंसी का प्रमोटर गलत है तो उसके पहले लोअर कोर्ट हाईकोर्ट तहसीलदार टाउन एंड कंट्री प्लानिंग नगर निगम स्वयं कलेक्टर नजूल और तत्कालीन कलेक्टर मंदसौर पी एस तोमर भी गलत है जिन्होंने उक्त जमीन बेची है l कलेक्टर के मातहतअधिकारी भी गलत है जिन्होंने कलेक्टर साहब को सच से अवगतनहीं कराया और कलेक्टर के हाथों एक बेगुनाह को फांसी पर चढ़ाने का सामान किया l खबर पक्की उम्मीद करता है कि तथ्य और सच को जानने के बाद कील कोरोना अभियान के विजेता कलेक्टर कुमार पुरुषोत्तम इस मामले की गहराई से पड़ताल कर दूध का दूध और पानी का पानी करेंगे l
