खबर पक्की: 2 अगस्त रतलाम, इन हँसती मुस्कुराती नीली तस्वीरों के लिए नवीन पटनायक को धन्यवाद दीजिये, क्योंकि हॉकी की पुरानी चमक को वापस लाने के लिए महिला और पुरुष हॉकी टीम को 5 साल के लिए बिना किसी विज्ञापन, बड़ी होर्डिंग्स, प्रचार के चुपचाप स्पॉन्सर किया है। और रिजल्ट देखिए! दशकों पुरानी चमक कई गुना ज्यादा उत्साह से देख रहे है।
अब तक के दो पदकों और इन मुस्कुराते चेहरों के बीच एक आंकड़ा ये भी है कि इस साल केंद्र सरकार ने खेलों का 230 करोड़ का बजट कम किया है, वो भी तब जबकि खेल का बजट पहले से ही कम था। और सरकार की बेशर्मी देखिए कि इन सब के बावजूद पदक जीतने के लिए केंद्र से लेकर राज्य सरकारें, होर्डिंग्स में अपनी बड़ी सी फोटो ऐसे लगा रही है जैसे पदक के लिए मैदान में खिलाड़ी नहीं, चार दिन पहले आये खेल मंत्री खेल रहे थे!
क्रिकेट के लिए अंधे हम लोग कभी दूसरे खेल और दूसरे खिलाड़ियों को वो सुविधा और सम्मान दे ही नहीं पाए जो किसी के लिए भी जरूरी होता है। जब तक अपनी खुद की मेहनत की वजह से कोई खिलाड़ी 2-4 वर्ल्ड चैंपियनशिप नहीं जीत जाता तब तक हम उसे खिलाड़ी ही नहीं मानते। और जैसे ही जीत जाता है, वैसे ही उस खिलाड़ी पर टूट पड़ते है, और उसके अलावा दूसरे खिलाड़ियों के साथ फिर वही व्यवहार।
हर बार ओलिम्पिक खेलों के बाद सरकार से उम्मीद की जाती है कि वो खेलों की तरफ ध्यान देगी, बजट बढायेगी, खिलाड़ियों को सुविधाएं देगी, लेकिन कुछ दिनों के जश्न के बाद कही से खबर आती है कि हमारे महान विश्वगुरु देश के खिलाड़ी विदेशों में अपने खाने के लिए भीख माँग कर खेल रहे है। तो इस तरह उन से उम्मीद करना गर्व नही हम सब के लिए शर्म का विषय होना चाहिए।
हॉकी की इन तस्वीरों में उम्मीद है, जुनून है, प्यार है, संघर्ष है खिलाड़ियों का भी और उन से जुड़े लोगों का भी। उन सभी को सलाम✊ उम्मीद है आपकी जीत हमारी सरकारों के आँख और कान खोलने का काम करेगी।और आगे आने वाले खिलाड़ियों की राह आसान करेगी।
