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सरकार का यह नियम कहीं फिर से कोरोना विस्फोट का कारण न बन जाए जनता और सरकार सावधान

BySurendra Jain

Jun 4, 2021

खबर पक्की : 4 जून रतलाम, अप्रैल और मई में जब कोरोना की दूसरी लहर अपने चरम पर थी और सरकारी हो या प्राइवेट सभी अस्पतालों ने घुटने टेक दिए थे और अस्पतालों में मरीजों को भर्ती करने से इंकार कर रहे थे। तब प्रशासन भी जांच नहीं करते हुए दवा लेकर 5 दिन घर बैठने का कह रहा था आज वही प्रशासन और वही सरकार सिर्फ आशंका और मामूली लक्षण पर जांच करवाने वालों को कह रही है कि अगर आपने जांच करवाई और रिपोर्ट पॉजिटिव आई तो आपको घर नहीं जाने दिया जाएगा आपको कॉविड केयर सेंटर या मेडिकल कॉलेज में भर्ती होना पड़ेगा। और यह सिर्फ रतलाम में नहीं पूरे प्रदेश में सरकार के इस तरह के निर्देश है सरकार व प्रशासन के इन निर्देशों और जनता की हठधर्मि के कारण मामूली लक्षण और शंका वाले मरीज जब डॉक्टर के पास जा रहे हैं और डॉक्टर सरकार के इस नियम को बता रहे हैं तो वह बगैर जांच किए ही डॉक्टर से ट्रीटमेंट लेने की मांग कर रहे हैं शहर के ख्यातनाम डॉक्टर के पास जब एक नौजवान महिला मरीज पहुंचती है और डॉक्टर कोरोना की आशंका होने पर जांच के लिए बोलता है और सरकार का नियम बताता है तो वह जांच कराने से इंकार कर देती है और कहती हैं कि आप तो ऐसे ही ट्रीटमेंट लिख दो मुझे जांच वाच नहीं कराना इस बाबत वह मेरे से भी चर्चा करती है। खबर पक्की ने इस संदर्भ में दो-तीन डॉक्टर से फोन लगाकर बात की और दो-तीन केमिस्ट से भी चर्चा की तो उन्होंने कहा कि यह सच है और सरकार के इस नियम की बाध्यता के कारण लोग जांच कराने में रुचि नहीं ले रहे हैं फल स्वरूप जो लोग वास्तविकता में कोरोना पॉजिटिव है लेकिन सरकार के इस नियम की बाध्यता के चलते जांच नहीं करा रहे हैं और डायरेक्ट कोरोना का ट्रीटमेंट लेकर हर जगह इधर-उधर आ जा रहे और घूम रहे होगे तो वह कितने लोगों को संक्रमित करेंगे आप इसका अंदाजा लगा सकते हैं और अब जब के बाजार पूरी तरह खुलना शुरू हो गए हैं ऐसे लोग कोरोना विस्फोट का बड़ा कारण बन सकते हैं। कोरोना का इलाज करने वाले विशेषज्ञ डॉक्टरों का भी यही कहना है कि सरकार को यह बाध्यता खत्म करना चाहिए अन्यथा जांच नहीं होने के कारण कई मरीज गंभीर स्थिति में पहुंच जाएंगे। हालांकि सरकार और प्रशासन का यह नियम जनता के भलाई के लिए ही है पर सरकार को यह समझना चाहिए कि कोई भी नियम सख्ती और बाध्यता से लागू करने के दुष्परिणाम भी होते हैं। इस बाध्यता का यह दुष्परिणाम नहीं हो की कहीं कोरोना का विस्फोट दोबारा से ना हो जाए। यह जनता और सरकार दोनों को समझना होगा।

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