खबर पक्की : 14 मई रतलाम, रतलाम में भी कोरोनावायरस के इलाज के बाद हुवे साइड इफेक्ट के कारण फैल रही बीमारी ब्लैक फंगस का मामला सामने आया है। टीआईटी रोड रतलाम पर रहने वाले स्टेट बैंक के रिटायर्ड बैंक कर्मी विक्रम सिंह चौहान के पुत्र धर्मपाल चौहान को कोरोना हो गया था, जिसका इलाज रतलाम मेडिकल कॉलेज में हुआ इसके बाद यह गायत्री हॉस्पिटल में भी कुछ दिन भर्ती रहे इनका कोरोना तो ठीक हो गया और रिपोर्ट भी नेगेटिव आ गई, किंतु उसके बाद चेहरे पर काफी सूजन आने पर इन्होंने डॉक्टर खंडेलवाल को दिखाया उन्होंने ब्लैक फंगस की शंका व्यक्त करते हुए इंदौर जाने का बोला इंदौर में डॉक्टर तापड़िया जोकि मुंबई हॉस्पिटल के डॉक्टर है उनको दिखाया तो उन्होंने ब्लैक फंगस होने की पुष्टि की और कहा कि हमारे यहां तो सिर्फ गंभीर मरीजों को भर्ती कर रहे हैं, आपका केस प्राथमिक स्टेज वाला है आप चोइथराम में भर्ती हो जाइए। अभी हाल फिलहाल वह चोइथराम हॉस्पिटल में भर्ती है और उनको ब्लैक फंगस के इलाज में लगने वाला इंजेक्शन AMPHOTRET या AMPHONEX 50 Mg की जरूरत होने के कारण और इंजेक्शन इंदौर में उपलब्ध नहीं होने से टीआईटी रोड पर रहने वाले दैनिक अवंतिका के ब्यूरो चीफ ओम त्रिवेदी जी को फोन लगाया तो उन्होंने खबर पक्की के संपादक सुरेंद्र जैन को फोन लगाने की सलाह दी जिस कारण यह मामला सामने आया विक्रम सिंह चौहान ने बताया कि धर्मपाल के परिवार में उनकी पत्नी के अलावा एक लड़का और एक लड़की है और दोनों नाबालिग है यह पहले कोका कोला कंपनी में काम करते थे और वर्तमान में डेयरी फार्म चला कर जीवन यापन कर रहे है। ज्ञातव्य है कि इंदौर सहित देशभर में कोरोना के साइड इफेक्ट वाली बीमारी ब्लैक फंगस के काफी मरीज सामने आ रहे हैं उन लोगों को ज्यादा हो रहा है जिनको शुगर की बीमारी पहले से है और इसकी दवाई भी काफी महंगी होकर ₹300000 का खर्च मामूली बात है और दवाई मिल भी नहीं रही है जिसके कारण काफी ब्लैक चल रहा है। कल फाइजर कंपनी ने इंदौर कलेक्टर को बताया कि उसके पास सिर्फ 50 इंजेक्शन और 50 गोली है जबकि सिर्फ एक मरीज को ही चार पांच इंजेक्शन रोज लगते हैं और करीब 25, 30 इंजेक्शन लगते है।
