खबर पक्की : रतलाम 4 दिसंबर, 25 नवंबर को छोटी दीपावली की जगमग रात में राजीव नगर में हुए लोमहर्षक हत्याकांड मैं मां बाप और बेटी की हत्या करने वाले दुर्दांत हत्यारे दिलीप को आखिर रतलाम पुलिस ने कल रात एक मुठभेड़ में मार गिराया। रात को 9:20 पर पुलिस अधीक्षक गौरव तिवारी को सूचना मिलती है कि हत्यारा दिलीप खाचरोद रोड से रतलाम आ रहा है और संभवत उसके घर MID टाउन में जाएगा पुलिस अधीक्षक तुरंत अपने द्वारा गठित की गई एसआईटी टीम को सूचना देते है और हत्यारे की लोकेशन बताते हैं। इस पर एसआईटी टीम तीन टुकड़ों में बंट कर मुखबिर द्वारा बताई गई लोकेशन पर पहुंचती है सबसे पहले पहुंचने वाली टीम का नेतृत्व एसआई अयूब खान माणक चौक थाना प्रभारी करते हैं। दूसरे टीम का नेतृत्व थाना स्टेशन रोड के थाना प्रभारी किशोर पाटन वाला करते है। जैसे ही पहले टीम के अनुराग वह हिम्मत को मिड टाउन कॉलोनी के पीछे वाले रोड पर जो कि खाचरोद तरफ जा रहा है। दिलीप दिखाई देता है तो वह उसको ललकारते है और समर्पण करने के लिए कहते हैं। तो दिलीप भी चिल्ला कर कहता है कि तुम मेरा घंटा उखाड़ नहीं सकते। थाना प्रभारी अयूब खान भी उसको हत्या डालने के लिए कहते हैं किंतु दिलीप अनुराग और हिम्मत से हाथापाई करने लगता है और माउजर निकालकर फायर कर देता है। एक गोली थाना प्रभारी अयूब खान के कान को हवा देते हुए निकल जाती है। उनके पेट और पसली में भी थोड़ी चोट आई हुई है। एसआईटी टीम को लग जाता है कि यह इस तरह काबू में नहीं आएगा तो उनकी तरफ से भी फायरिंग शुरू कर दी जाती है। करीब 10:12 मिनट चली इस मुठभेड़ में आखिर दुर्दांत हत्यारे को सीने में गोली लगती है और वह वहीं ढेर हो जाता है लेकिन यह निश्चित है कि अगर पुलिस जवाबी कार्रवाई नहीं करती तुरंत तो वह पुलिस में से एक दो को निपटा देता। इस मुठभेड़ में जो टीम शामिल थी वह बलराम पाटीदार सीसीटीएनएस शाखा रतलाम अनुराग यादव साइबर सेल रतलाम आरक्षक विपुल भावसार हिम्मत सिंह गौर साइबर सेल रतलाम और जैसा कि शुरू में ही बताया थाना प्रभारी अयूब खान इस टीम मैं शामिल थे। मुठभेड़ चलने के दौरान बाकी दो टीम भी पुलिस की पहुंच गई थी। रतलाम पुलिस कि इस कार्रवाई की चहु और प्रशंसा हो रही है। आखिर इतने खतरनाक हत्यारे को इतनी जल्दी अंजाम तक पहुंचाना वाकई भारी सफलता है। पुलिस के सही काम में भी कुछ मीडिया वाले पेंच ढूंढ रहे हैं जिसकी शहर के लोगों में अच्छी प्रतिक्रिया नहीं है। पुलिस गलत करें तो आप उसे सूली पर टांग दो लेकिन सही काम पर भी अगर आप उस की पीठ नहीं थपथपा पाए तो यह पत्रकारिता और अपने पाठकों के साथ अन्याय होगा।
