खबर पक्की: 7 सितंबर रतलाम, एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कोरोना वारियर्स का सम्मान करने की बात कह रहे है वही इस महामारी के दौर में भी अपनी जान को जोखिम में डालते हुए उपभोक्ताओं को सेवा देने वाले बैंक कर्मियों को कोरोना ग्रस्त होने के बावजूद क्वारंटाइन न करते हुए सेवा देने के लिए मजबूर किया जा रहा है जिससे खुद बैंक कर्मियों के साथ-साथ बैंक में आने वाले उपभोक्ताओं का जीवन संकट में पड़ने की प्रबल संभावना है। उक्त मामला बैंक ऑफ इंडिया रतलाम की बजाज खाना ब्रांच का है जहां के खजांची कोरोना पॉजिटिव पाए गए शुक्रवार शाम को 6:00 बजे उनकी रिपोर्ट प्राप्त हुई 2 दिन पहले उन्होंने सैंपल दिया था इस दरमियान वह बैंक में काम करते रहे और दर्जनों लोगों के संपर्क में आते रहे किंतु प्रशासन द्वारा एक भी बैंक कर्मचारी का कोरोना टेस्ट नहीं किया गया जब के बैंक प्रबंधन द्वारा उन से निवेदन किया गया था कि यह जानलेवा बीमारी है और बैंक में आने वाले कस्टमर भी इससे प्रभावित हो सकते हैं अतः सब का चेकअप किया जाए और एहतियात के तौर पर सबको क्वॉरेंटाइन किया जाना चाहिए इस बारे में बैंक प्रबंधन से चर्चा की गई तो उन्होंने कहा कि हम छोटे कर्मचारी हैं यह निर्णय बैंक के प्रबंधन के ऊपर लेवल पर लिया जा सकता है या फिर प्रशासन द्वारा किंतु बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा भी बैंक कर्मियों के साथ-साथ अपने उपभोक्ताओं का जीवन खतरे में डाला जा रहा है उक्त खजांची के संपर्क में आने वाले सभी बैंक कर्मियों के साथ आज बैंक सोमवार को दिनभर खुली रही और सैकड़ों उपभोक्ताओं ने बैंक कर्मियों के साथ लेनदेन किया जबकि उक्त खजांची के साथ संपर्क में आए सभी बैंक कर्मचारियों को लगभग 5 दिन तो कम से कम क्वॉरेंटाइन किया जाना था और बैंक को बंद रखना चाहिए था किंतु प्रशासन द्वारा भी इस संबंध में गैर जिम्मेदाराना रवैया अपनाते हुए बैंक शाखा खोले जाने के संबंध में कोई निर्देश जारी नहीं किए और नहीं बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस संबंध में कोई निर्देश जारी किए यही कारण है कि बैंक प्रबंधन को मजबूरी में बैंक खोलना पड़ा बैंक ऑफ इंडिया में आने जाने वाले ग्राहकों और बैंक कर्मियों का भगवान ना करें कोई अनर्थ ना हो लेकिन प्रशासन और वरिष्ठ बैंक अधिकारियों की लापरवाही इन पर भारी पड़ सकती है।
