खबर पक्की, 26 अगस्त, लखनऊ ।अब डिजिटल तराजू में चिप लगाकर दुकानदार कर रहे हैं फर्जीवाड़ा, पुलिस ने पूरी फैक्ट्री पकड़ ली। न्याय की देवी के हाथ में क्या है? तराजू. तराजू में क्या है? कुछ नहीं? ग़लत. तराजू में है अतुल्य भरोसा, इतना ज़्यादा भरोसा कि न्याय की देवी भी आंख पर पट्टी बांध लेती हैं। सबको सबका हिस्सा मिलेगा तोल मापकर। फिर इंसान ने लगाया दिमाग़. तराजू के एक पलड़े में लगाने लगा चुम्बक भरोसा टूटा।
फिर बाक़ी इंसानों ने लगाया और ज़्यादा दिमाग़। तराजू पर तोल दी तकनीक. बनाया डिजिटल तराजू. चुम्बक लगे ना बटखरा, माल भी चोखा पाओ। डिजिटल तराजू ने बता दिया कि टमाटर एक किलो है तो एक ही किलो होगा। चाहे टमाटर ख़ुद चीख-चीख के कहे कि पचास ग्राम कम है भाऊ। लेकिन डिजिटल पर भरोसा अडिग है। लेकिन वो भरोसा ही क्या जिसे कोई डिगा ना सके। लखनऊ एसटीएफ ने ऐसे ही एक कारखाने का पता लगाया जो चिप लगाकर डिजिटल तराजू में भी तीन-पांच कर रहा था। एक गैंग हत्थे चढ़ा है पुलिस के। इनका काम था ऐसे डिजिटल तराजू बनाना जिसमें चिप लगाकर अपने मन से तोल माप घटाओ बढ़ाओ। फैक्ट्री से भारी मात्रा में तराजू मिले। कितनी भारी मात्रा में मिले ये तोलने के लिए तराजुओं को धरम कांटा ले जाया गया होगा!
बताया जा रहा है कि लखनऊ एसटीएफ को कहीं से टिप मिली। लखनऊ समेत आस-पास के इलाके में एक गैंग सक्रिय है जो तराजू में गड़बड़ कर रहा है। ये लोग अवैध इलेक्ट्रॉनिक तराजू बनाकर उसमें चिप फिट कर देते हैं। इससे होता ये है कि एक बटन दबाकर दुकानदार जित्ता चाहे उतना वजह आपको दिखा देगा।
न्यूज़ क्या चल रहा है?
अब डिजिटल तराजू में चिप लगाकर दुकानदार कर रहे हैं फर्जीवाड़ा, पुलिस ने पूरी फैक्ट्री पकड़ ली अब डिजिटल तराजू में चिप लगाकर दुकानदार कर रहे हैं फर्जीवाड़ा, पुलिस ने पूरी फैक्ट्री पकड़ ली बाएं वो तस्वीर है जो तराजू चिप लगा हुआ मिला है पुलिस को, दाएं सांकेतिक तस्वीर है न्याय की देवी के हाथ में क्या है? तराजू. तराजू में क्या है? कुछ नहीं? ग़लत. तराजू में है अतुल्य भरोसा। इतना ज़्यादा भरोसा कि न्याय की देवी भी आंख पर पट्टी बांध लेती हैं। सबको सबका हिस्सा मिलेगा तोल मापकर। फिर इंसान ने लगाया दिमाग़. तराजू के एक पलड़े में लगाने लगा चुम्बक. भरोसा टूटा.
फिर बाक़ी इंसानों ने लगाया और ज़्यादा दिमाग़. तराजू पर तोल दी तकनीक. बनाया डिजिटल तराजू। चुम्बक लगे ना बटखरा, माल भी चोखा पाओ। डिजिटल तराजू ने बता दिया कि टमाटर एक किलो है तो एक ही किलो होगा। चाहे टमाटर ख़ुद चीख-चीख के कहे कि पचास ग्राम कम है भाऊ। लेकिन डिजिटल पर भरोसा अडिग है। लेकिन वो भरोसा ही क्या जिसे कोई डिगा ना सके। लखनऊ एसटीएफ ने ऐसे ही एक कारखाने का पता लगाया जो चिप लगाकर डिजिटल तराजू में भी तीन-पांच कर रहा था। एक गैंग हत्थे चढ़ा है पुलिस के। इनका काम था ऐसे डिजिटल तराजू बनाना जिसमें चिप लगाकर अपने मन से तोल माप घटाओ बढ़ाओ। फैक्ट्री से भारी मात्रा में तराजू मिले। कितनी भारी मात्रा में मिले ये तोलने के लिए तराजुओं को धरम कांटा ले जाया गया होगा!
मामला सुन लीजिए
बताया जा रहा है कि लखनऊ एसटीएफ को कहीं से टिप मिली। लखनऊ समेत आस-पास के इलाके में एक गैंग सक्रिय है जो तराजू में गड़बड़ कर रहा है। ये लोग अवैध इलेक्ट्रॉनिक तराजू बनाकर उसमें चिप फिट कर देते हैं। इससे होता ये है कि एक बटन दबाकर दुकानदार जित्ता चाहे उतना वजह आपको दिखा देगा।
पुलिस को पता चला कि पूरी फैक्ट्री चला रहे हैं इलेक्ट्रोनिक तराजू की. और बनाकर अलग-अलग जगह भेज रहे हैं। मुखबिर की सूचना पर एसटीएफ ने लखनऊ के कृष्णानगर अवैध इलेक्ट्रॉनिक तराजू की फैक्ट्री पर छापा मारा। मालिक अशफाक अली नगराम में रहता था उसको यूपी एसटीएफ ने गिरफ्तार किया है। इसके पास से सैकड़ों अवैध इलेक्ट्रॉनिक तराजू बरामद हुए हैं। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि अवैध इलेक्ट्रॉनिक तराजू का निर्माण करता है, उसमें एक बटन फिट कर देता है। इससे सामने वाले को सामान उसी तरीके से उतना ही वजन का दिखाई देगा, लेकिन बटन दबाने के बाद वजन अपने आप कम या ज्यादा किया जा सकता है। ज्यादातर ऐसे अवैध चिप लगी इलेक्ट्रॉनिक तराजू को मंडी के बाहर या गांव में सामान तौलने के लिए प्रयोग में लाया जाता था।
ये लोग लखनऊ सहित प्रदेश के अन्य जिलों में भी अवैध इलेक्ट्रॉनिक तराजू में चिप लगाकर सप्लाई करते थे। अभी एक आरोपी गिरफ़्तार हुआ है। बाक़ी जांच चल रही है. हो सकता है अभी और मामले निकलें। एसटीएफ के एडिशनल एसपी विशाल विक्रम सिंह ने घटना के बारे में मीडिया को बताया।
सावधान कोई आपको लूट रहा है अब डिजिटल तराजू में चिप लगाकर दुकानदार कर रहे हैं फर्जीवाड़ा
