नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने बच्चों को सुसाइड के लिए उकसा रहे ब्लू व्हेल चेलेंज गेम पर प्रतिबंध लगा दिया है। भारत में इस गेम ने दो किशोरों की जान ले ली है। गेम को खेलने के बाद सबसे पहले मुंबई के रहने वाले 14 साल के मनप्रीत ने सुसाइड कर लिया था। इसके अलावा पश्चिम बंगाल के मिदनापुर में रहने वाले 10वीं के छात्र अनकन डे ने भी इस गेम के चैलेंज पूरा करने के लिए खुद का जीवन लील लिया था। मध्यप्रदेश के इंदौर में भी एक किशोर ने भी इस गेम को खेलने के बाद सुसाइड की कोशिश की थी। केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी और केरल के मुख्यमंत्री पिनरय विजयन इस गेम पर प्रतिबंध लगाने की केंद्र सरकार से मांग कर रहे थे।
चैलेंज को कैसे करेंगे बैन?
ब्लू व्हेल चैलेंज गेम कोई ऐप नहीं है, जिसे डाउनलोड और सब्सक्राइब किया जा सके। इसमें प्लेयर को 50 टास्ट की लिस्ट दी जाती है, जिसे पूरा करना होता है। हर टास्क के बाद प्लेयर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फोटो शेयर करनी होती है। यहीं से एडमिन और क्यूरेटर प्लेयर से संपर्क साधते हैं और उसे दूसरा टास्क देते हैं। इस चैलेंज में फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हॉट्सऐप और स्नैपचैट का उपयोग होता है। क्यूरेटर इनमें से किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए प्लेयर से संपर्क साध सकता है। ऐसे में सवाल उठता है कि सरकार इस गेम को कैसे ट्रैक करेगी ताकि बैन किया जा सके।
22 साल का युवक है मास्टर माईंड
‘ब्लू व्हेल चैलेंज गेम’ को फिलिप बुदेइकिन ने बनाया है। उसे इसके लिए पिछले महीने साइबेरियन कोर्ट ने तीन साल की जेल हुई है। फिलिप रूस का रहने वाला हैं। उसकी उम्र 22 साल है। अपने एक इंटरव्यू में फिलिप ने इस खतरनाक गेम को बनाने की बात भी स्वीकारी है। उससे जब पूछा गया कि क्या उसने जानबूझकर किशोरों को मौत के मुंह में धकेलने के लिए यह गेम बनाया है तो उसका कहना था- ‘हां’।
प्लेयर को दिए जाते हैं ये टास्क
प्लेयर को गाने सुनने, हॉरर फिल्म देखने, आधी रात को उठने, ब्लेड से स्किन पर व्हेल की आकृति बनाने या फिर कुछ लिखने समेत कई खतरनाक टास्क दिए जाते हैं। एक वेबसाइट के मुताबिक, पहला चैलेंज सुबह 4.29 बजे से शुरू होता है। गेम में प्लेयर जानबूझकर खुद को क्षति पहुंचाए, इसके लिए एक से बढ़कर एक खतरनाक टास्क दिए जाते हैं। मना करने पर किशोरों को बरगलाया जाता है और उनकी गोपनीय सूचनाएं सार्वजनिक करने तक की धमकी दी जाती है।
