खबर पक्की: 14 अप्रैल मुंबई, मेरे बाल सखा और परम मित्र देवेंद्र श्रीमाल जो आजकल मुंबई में लोखंडवाला काम्प्लेक्स में रहते हैं के 26 मार्च से किए जा रहे निरंतर प्रयासों की बदौलत भारतीय खाद्य निगम ने कोरोना महामारी के चलते जारी लॉकडाउन के दौरान ऐसे प्रवासी मजदूर और गरीबों के लिए जिनके पास राशन कार्ड की उपलब्धता नहीं है और जिन्हें एनजीओ के मार्फत या सामाजिक संगठनों के द्वारा निशुल्क अनाज उपलब्ध करवाया जा रहा है ऐसी संस्थाओं को 21 रुपए किलो गेहूं और 22 किलो चावल देने के लिए भारतीय खाद्य निगम ने पूरे देश भर के अपने कार्यालयों को लिख दिया है। जिससे बाजार से बांटने के लिए महंगी दर पर अनाज खरीदने की बजाय ऐसी संस्थाएं रियायती दर पर भारतीय खाद्य निगम से अनाज प्राप्त कर गरीबों को बांट सकती है। इस प्रकार वह प्राप्त चंदे का अधिकतम लाभ गरीबों तक पहुंचा सकते हैं। इस संबंध में भारतीय खाद्य निगम के निर्देशन मंडल व चेयरमैन द्वारा उचित माध्यम से देशभर में राज्य की राजधानियों में स्थित उनके कार्यालयों को पत्र भेजकर 8 अप्रैल को ही सूचित कर दिया गया है। देवेंद्र श्रीमाल ने मुंबई से फोन पर बताया कि पहले इसमें भारतीय खाद्य निगम ने 10 टन की लिमिट बांधी थी, बाद में विस्तृत चर्चा के बाद अगले ही दिन उक्त लिमिट को हटा दिया है। अब चाहे जितना अनाज ऐसी संस्थाएं जो वास्तव में सेवा कर रही है लेकर गरीबों को वितरण कर सकती है। उन्होंने बताया कि कुछ संस्थाओ द्वारा भारतीय खाद्य निगम से उक्त रियायती दर पर अनाज प्राप्त कर वितरण का काम भी चालू कर दिया गया है व उम्मीद व्यक्त की है कि अधिक से अधिक सेवाभावी संस्थाएँ इस का लाभ जनसामान्य तक पहुँचाने का प्रयास करेंगी।
