खबर पक्की:9 अप्रैल रतलाम, व्यवस्था को दोष देना बड़ा आसान है प्रदेश के सर्वाधिक साक्षर माने जाने वाले रतलाम शहर में शहर के बीचों-बीच घनी बस्ती लोहार रोड पर इंदौर से एक कोरोना संदिग्ध शव आता है उसके जनाजे में बड़ी तादाद में लोग शामिल होते हैं और शहर के पढ़े-लिखे लिखे बाशिंदे जो दूसरों को बात-बात पर जाहिल करार देते है, इस जनाजे को मूक दर्शक बने देखते रहते है अब वे खुद को किस श्रेणी में रखना पसंद करेंगे। यह एक आदमी का जनाजा नहीं है यह पूरी व्यवस्था हर रतलामी का जनाजा है। यह अपने आपको साक्षर नगर कहने वाले शहर का जनाजा है। यह तमाम जनप्रतिनिधियों समाजसेवियों पार्षदों का जनाजा है। है तमाम उन लोगों का जनाजा है जो हर वक्त सिर्फ दूसरों पर उंगली उठाते रहते हैं। यह किसी एक फर्जी पत्रकार या किसी एक परिवार की जिद का जनाजा नहीं अपितु अनुशासनहीन समाज की सामूहिक विफलता का जनाजा है। नवागत ऊर्जावान डीआईजी रुचि वर्धन मिश्र, कलेक्टर रुचिका चौहान, और एसपी गौरव तिवारी को इस विफलता से बाहर आकर सफलता का परचम लहराना ही होगा अभी तक उन्होंने अपने तई भरसक प्रयास किए हैं लेकिन अनुशासन हीन समाज को उसी के हित के लिए प्रशासन को अपनी सख्ती का परिचय देना ही होगा वैसे भी बगैर डंडे के डिसिप्लिन की कल्पना करना हिंदुस्तान में व्यर्थ है इसलिए अनुशासनहीन कोई भी व्यक्ति चाहे वह कितना भी बड़ा पत्रकार हो नेता हो जनप्रतिनिधि हो अफसर हो पर एक समान कार्रवाई करना जरूरी है तभी आप अपने साथ साथ इस शहर की प्रतिष्ठा को भी कायम रख पाएंगे इसलिए कहावत को सार्थक सिद्ध करने का समय आ गया है वैसे भी आपके नाम में चौहान है इसलिए मत चुक चौहान के आदर्श वाक्य को ध्यान में रखकर चलिए सफलता आपके कदम चूमेगी।
