रतलाम। कृषि उपज मंडी समिति का महू रोड़ स्थित एक कॉलोनी की जमीन पर दावा हाइकोर्ट से खारिज हो गया है। हाइकोर्ट का फैसला आने के बाद अब यह साफ हो गया है कि जिस जमीन को मंडी समिति मंडी के विस्तार के लिए जरूरी बताते हुए अधिग्रहित करने की प्रक्रिया शुरू की गई थी, दरअसल वह प्रक्रिया ही गलत थी।
बुधवार को हाइकोर्ट जस्टिस विवेक रूसिया की कोर्ट से मंडी समिति रतलाम की अपील खारिज कर दी गई। इस मामले में कॉलोनाइजर राजेंद्र पितलिया की ओर से एड्वोकेट अक्षत पहाड़िया ने और मंडी समिति की ओर से एड्वोकेट जी.के. पाटीदार ने पक्ष रखा था। कोर्ट ने मंडी की याचिका खारिज करते हुए किसी तरह के कमेंट किए है, इस पर फिलहाल स्थिति साफ नहीं है। हालांकि फैसले से यह तय हो गया है कि महू रोड़ स्थित जिस जमीन पर कॉलोनाइजर राजेंद्र पितलिया का प्रोजेक्ट था, उस जमीन को गैर वाजिब तरीके से हथियाने के लिए षड़यंत्र रचा गया था।
ऐसे तो हो चुका रतलाम का विकास
मंडी समिति की याचिका हाइकोर्ट में खारिज होने से एक बात साफ हो गई है कि शहर के विस्तार से जुड़े एक अहम प्रोजेक्ट को रतलाम में जानबूझकर राजनीति का शिकार बनाया गया था। दरअसल महू रोड़ स्थित निर्माणाधीन कॉलोनी की जमीन को हथियाने के लिए मंडी प्रांगण के विस्तार की आड़ ली गई थी। हकीगत में कुछ लोग इस पूरे प्रकरण में अडंगा डालकर अपनी स्वार्थसिद्धी करना चाहते थे। चंद ऐसे ही लोगों की हरकतों की वजह से कोई भी बाहरी कॉलोनाइजर या उद्योगपति रतलाम में अपना प्रोजेक्ट शुरू करने में हिचकता है।
