नई दिल्ली। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने देश के ताजा हालात को लेकर आगाह किया है। उन्होंने कहा कि भारत सामाजिक असमानता, आर्थिक मंदी और वैश्विक स्वास्थ्य महामारी की ‘त्रिमूर्ति’ के आसन्न खतरे का सामना कर रहा है। यह जोखिमों का प्रबल संयोजन न केवल भारत की आत्मा को भंग कर सकता है, बल्कि इसके वैश्विक स्तर को कम कर सकता है।
एक अंग्रेजी अखबार में लिखे लेख में पूर्व पीएम ने कहा, भारत जिसे हम जानते और संजोते हैं उसका स्वरूप तेजी बिगड़ रहा है। स्थिति बहुत गंभीर है। उन्होंने दिल्ली सांप्रदायिक हिंसा का जिक्र करते हुए कहा, सांप्रदायिक तनाव और समाज के अनियंत्रित वर्गों द्वारा फैलाई गई धार्मिक असहिष्णुता की लपटें देश के सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुंचा रही हैं। यूनिवर्सिटी कैंपस, सार्वजनिक स्थान और निजी घरों तक सांप्रदायिक हिंसा और धार्मिक असहिष्णुता की आग पहुंच चुकी है।
उन्होंने कहा, कानून और व्यवस्था बनाए रखने वाली संस्थाओं ने अपना ‘धर्म’ छोड़ दिया है। न्यायिक संस्थाएं और लोकतंत्र का चौथा खंभा कहने जानी वाली मीडिया भी अपने कर्तव्य का निर्वहन करने में विफल साबित हुई हैं। यह भारत के इतिहास में सबसे बुरा समय है। आज भारत समेत पूरी दुनिया पर कोरोना वायरस का खतरा मंडरा रहा है, लेकिन सामाजिक अशांति और आर्थिक हालात के लिए तो हम खुद जिम्मेदार हैं।’
इतिहास के सबसे बुरे दौर से गुजर रहा हमारा भारत: मनमोहन
