खबर पक्की: 7 जनवरी रतलाम, अंधा बांटे रेवड़ी अपने अपने को दे जी हां रतलाम नगर निगम पर उक्त कहावत पूरी तरह चरितार्थ हो रही है। पूरे मामले को सिलसिलेवार इस तरह समझ सकते हैं। मामला नंबर 1 जेएमडी इसमें ज्यादातर निर्माण अस्थाई प्रकृति के शेड का था जिसमें जुर्माना कंपाउंडिंग करके काम खत्म हो सकता था किंतु सस्ती वाह वाही और लोकप्रियता के लिए उसको ऐसे ढहाया गया जैसे कि उसका मालिक कोई बहुत बड़ा माफिया हो। मामला क्रमांक 2 शांति लाल पितलिया के मकान को नापना और नोटिस देना इसमें भी नगर निगम द्वारा यह बताया गया कि उस लाइन के सभी मकानों को नापा जाएगा और सब के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी किंतु मात्र एक मकान नापने के बाद सिर्फ उन्हीं को नोटिस दिया गया जिसके खिलाफ शांति लाल पितलिया का मामला कोर्ट में है। कोर्ट में भी नगर निगम द्वारा पेश जवाब में यह बताया गया कि पितलिया द्वारा पेश किया गया कंपाउंडिंग का आवेदन गलत है और हमारे पोर्टल में अभी कंपाउंडिंग का कोई कोई सिस्टम काम ही नहीं कर रहा है इसलिए उनके द्वारा पेश रसीद गलत है और हमारे यहां कंपाउंडिंग का कोई आवेदन पेंडिंग नहीं है। यहां दिलचस्प तथ्य यह है कि शांति लाल पितलिया ने ऑनलाइन पोर्टल में कंपाउंडिंग के लिए जो फीस जमा की है उसी पोर्टल के आधार पर कई लोगों का कंपाउंडिंग नगर निगम द्वारा किया जा चुका है। उदाहरण के लिए खेतलपुर में बना देव श्री गार्डन जोकि विश्वराज मूणत व संतोष मूणत के नाम पर है का कंपाउंडिंग भी उसी पोर्टल और उसी हेड में नगर निगम द्वारा 15 मई 18 को किया गया जिसमें रसीद क्रमांक 0 318 से रुपए 1042700 व रसीद क्रमांक 0 319 से रुपए 141480 जमा कर नगर निगम द्वारा कंपाउंडिंग की गई यह दिलचस्प तथ्य है कि आयकर नियमों के अनुसार दो लाख से ज्यादा रकम कोई भी आदमी नगद जमा नहीं करवा सकता और कोई भी संस्था नगद नहीं ले सकती किंतु नगर निगम जैसी जिम्मेदार संस्था द्वारा किस प्रकार यह नगद राशि जमा की गई यह भी एक शोध का विषय हो सकता है। इसी प्रकार के मामले चंदू भंडारी और अनिल झालानी के भी है इन मामलों से समझा जा सकता है कि नगर निगम मनमर्जी से कंपाउंडिंग के नियमों का उपयोग कर रहा है जिस मामले में उसको कंपाउंडिंग करना है वह कर रहा है उसके पीछे वजह चाहे जो हो और जिन से द्वेष ता पूर्वक बदले की कार्रवाई करना है चाहे वह किसी के भी इशारे पर हो उसके लिए कोई रू रियायत नहीं है। इन प्रकरणों और वाक्यों से ऐसा लगता है कि नगर निगम में कोई अदृश्य हाथ काम कर रहा है ।जनता और जनप्रतिनिधियों को इस बात को समझना होगा नहीं तो इस तरह की भेदभाव पूर्ण कार्रवाई से शहर में असंतोष का माहौल और ला एंड आर्डर की स्थिति व्याप्त हो सकती है।
