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माफिया को माफी और व्यापारी को फांसी यह किसी सोनी, पितलिया, भंडारी पर नही रतलाम की अस्मिता पर हमला है।

BySurendra Jain

Jan 3, 2020

खरी खरी
खबर पक्की: 3 जनवरी रतलाम, जिस तरह जेएमडी मैरिज हाल को 6 घंटे का नोटिस देकर तोड़ा गया उसके बाद राजेंद्र पितलिया को नोटिस दिया गया फिर चंद्रप्रकाश भंडारी को नोटिस दिया गया फिर अनिल झालानी को नोटिस दिया गया यह किसी प्रवीण सोनी पितलिया भंडारी या झालानी पर हमला नहीं है यह रतलाम की अस्मिता पर इसके जिंदा होने पर हमला है। प्रवीण सोनी, राजेंद्र पितलिया, चंद्र प्रकाश भंडारी या अनिल झालानी यह वह नाम है जिन्होंने अपनी मेहनत और कार्यकुशलता के बल पर शहर में अपना एक मुकाम बनाया और शहर के विकास में अपना योगदान दिया किंतु निगम व जिला प्रशासन ने जिस तरह M OS के नाम पर चिन्हित व्यापारियों पर धमकाने वाली कार्रवाई की और जिस तरह पूरा शहर, राजनीतिक पार्टियां, सामाजिक कार्यकर्ता चुने हुए जनप्रतिनिधि मूक दर्शक बनकर देख रहे है वह इस शहर के जिंदा होने पर सवाल खड़े करता है। मेरा शहर की जनता और जनप्रतिनिधियों से सवाल है कि क्या पूरे सागोद रोड पर सिर्फ जेएमडी मैरिज हाल और राजेंद्र पितलिया के मकान में ही MOS का उल्लंघन है या पूरे नोलाईपुरा में सिर्फ चंद्रप्रकाश भंडारी ने हीं MO S का उल्लंघन किया है अगर पूरे रतलाम शहर में सिर्फ यह चारों ही MO S के उल्लंघन के दोषी है तो चढ़ा दीजिए इनको फांसी पर और अगर नहीं तो खुलकर निगम और प्रशासन के खिलाफ बदनियति से की जा रही कार्रवाई के खिलाफ मैदान में आ जाइए क्योंकि आज यह इन चार के साथ कर रहे है आप चुप रहे तो कल रतलाम में 40 के साथ और करेंगे अन्याय करना जितना बड़ा अपराध है अन्याय होते हुए देखना उससे भी बड़ा अपराध है। 98 % शहर में MOS का उल्लंघन है निगम से जारी होने वाली हर निर्माण अनुमति मे नियम विपरीत निर्माण होने का नोटिस जारी किया जाता है और पैसे लेकर उस नोटिस को फाड़ दिया जाता है निगम से पूर्व में अनेक बार साल भर या 6 महीने में जारी होने वाली निर्माण अनुमति यो और विपरीत निर्माण के नोटिस ओं के बारे में सूचना के अधिकार में जानकारी मांगी गई लेकिन एक बार भी इस संबंध में जानकारी प्रदान नहीं की गई MOS का उल्लंघन निर्माण अनुमति जारी करने वाले अधिकारियों के संरक्षण के बगैर नामुमकिन है कहने का मतलब यह है कि अगर दोषी सभी है तो फिर सजा सिर्फ चार को क्यों पूरे शहर को मिलना चाहिए उन अधिकारियों को भी मिलना चाहिए जिनके टाइम में इन मकानों का निर्माण हुआ है कहते है कानून की नजर में सब बराबर होते हैं किंतु यहां तो कानून का पालन कराने वाले ही द्वेष पूर्ण कार्य कर रहे है । सरकार ने माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई करने का आदेश दिया है लेकिन लगता है कि रतलाम जिला और निगम प्रशासन को शासन की मंशा की कोई चिंता नहीं है और वह मनमानी पूर्ण तरीके से कार्य कर रहा है आने वाले नगर निगम के चुनाव में जब जनप्रतिनिधि वोट मांगने आए तब यह सवाल जरूर पूछिए कि रतलाम जल रहा था तब आप कहां सोए हुए थे। यह शहर हम सबकी जिम्मेदारी है मैंने तो अपनी जिम्मेदारी पूरी कर दी अब आपकी जिम्मेदारी है जय हिंद

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