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गेंहू के साथ घुन मत पीसिये SP साहब, यह मत भूलिए कि इसी रतलाम ने आपको सिंघम बनाया था

BySurendra Jain

Dec 29, 2019

(त्वरित टिप्पणी)
खबर पक्की: 29 दिसंबर रतलाम, गेहूं के साथ घुन मत पीसिये एस पी साहब, गेहूं में कंकर हर जगह पाए जाते हैं कहीं कम तो कहीं ज्यादा हम यह नहीं कहते कि सभी पत्रकार दूध के धुले हैं, लेकिन इसका मतलब यह भी नहीं कि रतलाम की समूची पत्रकारिता और पत्रकार जगत में कुछ भी उल्लेखनीय नहीं है। महोदय कल आपने कितनी आसानी से कह दिया कि रतलाम में सर्वाधिक नकारात्मक पत्रकारिता होती है और मैं पूरे 1 साल से किसी अखबार को नहीं पढ़ रहा हूं, हो सकता है कि कुछ पत्रकारों या कुछ अखबारों ने आपके लिए बगैर तथ्यात्मक पड़ताल किए कुछ गलत लिख दिया हो लेकिन उसको इस तरह दिल पर लेकर सभी पत्रकारों के बारे में और रतलाम व जिले की पत्रकारिता के बारे में इस तरह के पूर्वाग्रह रखना आप जैसे कद वाले व्यक्ति को शोभा नहीं देता। यह कहने के पहले आपने यह तो सोच लिया होता कि ट्रेनिंग पीरियड आपका रतलाम में ही गुजरा था और उसी दरमियान आपकी दबंग कार्य प्रणाली को देखते हुए आपको सिंघम की उपाधि इन्हीं रतलाम के पत्रकारों ने दी थी जिस रतलाम के पत्रकारों ने गौरव तिवारी को सिंघम बनाकर पूरे प्रदेश और देश में प्रसिद्ध दिलवाई उन्ही पत्रकार और पत्रकारिता पर कल आपने इतने सवालिया निशान खड़े कर दिए तो मन तो दुखेगा ही, आपने यह सही कहा कि आप के बीच के गलत और बहुरुपिये पत्रकारों को आपको ही पहचानना पड़ेगा और छांटना पड़ेगा महोदय संस्था या
संगठन के स्तर पर यह हमारी कमजोरी हो सकती है कि हम ऐसे लोगों को छांट नहीं पाए फिर भी हम निरंतर इस पेशे की पवित्रता के लिए प्रयास करते रहते हैं। आदरणीय जिस तरह पुलिस में सभी ईमानदार नहीं हो सकते उसी तरफ पत्रकारिता में भी सभी ईमानदार नहीं है हम यह मानते हैं और स्वीकार करते हैं लेकिन जिस तरह कुछ गलत पुलिस वालों के लिए पूरे पुलिस संगठन को बदनाम नहीं किया जा सकता या दोष नहीं दिया जा सकता उसी तरह कुछ गलत पत्रकारों या कुछ गलत खबरों( जो आपकी नजर में गलत है) के लिए समूची पत्रकारिता को दोष देना कहां तक उचित और न्यायोचित है। महोदय कल के कार्यक्रम का विषय जन सरोकार और संवाद था और रतलाम की डेढ़ सौ साल की पत्रकारिता का इतिहास इसी से जुड़ा हुआ है, नगर निगम में सफाई कर्मियों की हड़ताल होने पर पत्रकारों ने जब झाड़ू पकड़ी तो सफाई कर्मियों ने नवरात्रि के मौके पर हड़ताल को खत्म कर जनता की परेशानियों को समझा उसी प्रकार उरी में हमला होने पर सैनिक मारे जाते है तो पूरा रतलाम बगैर जाति धर्म राजनीति की परवाह कर सामूहिक रूप से पत्रकारों के मार्च में शरीक होता है। महोदय आपने कहा कि रतलाम में सर्वाधिक नकारात्मक पत्रकारिता होती है तो आपको बता दूं कि जब छतरी पुल का ब्रिज गिर जाता है पुलिस नगर निगम और प्रशासन असहाय से खड़े रहते हैं तब रतलाम का पत्रकार पैदल मार्च के लिए सुबह 5:00 बजे जनता को आह्वान करता है तो सारी राजनीतिक पार्टियां अपने मतभेद बुलाकर उसके साथ हो जाती है तो कलेक्टर तन्वी सुंद्रियाल 48 घंटे में डायवर्सन रोड़ बनवा कर देती है।यह है रतलाम के पत्रकार और पत्रकारिता की ताकत महोदय कुछ खबर और कुछ पत्रकारों से रतलाम के पत्रकारिता जगत और पत्रकारों का आकलन मत कीजिए नहीं तो घाटे में रहेगे क्योंकि रतलाम का पत्रकार यहा आने वाले हर अधिकारी का तहे दिल से इस्तकबाल करता है और अच्छे काम करने वाले को सिर माथे पर बिठाता है बस उसके साथ थोड़ा प्यार से तहजीब से तरीके से पेश आइए इससे ज्यादा उसे कुछ नहीं चाहिए। तुलसीदास जी ने भी कहा है कि निंदक नियरे राखिए आंगन कुटी छवाय बिन पानी साबुन बिना निर्मल करे सुभाय। महोदय आपका बहुत लंबा और चमकदार केरियर अभी बाकी है हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं लेकिन थोड़ा सा आपको पत्रकारों के प्रति धारणा को बदलने की जरूरत है क्योंकि इस तरह की धारणा आपकी प्रगति में साधक नहीं बाधक साबित होगी इन पंक्तियों के साथ अपनी बात को विराम देता हूं कि मन में आये नहीं मलीनता सुख दुख आते जाते, और कहता गुलाब देखो हम कांटों में भी मुस्काते।

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