खबर पक्की: 13 दिसंबर रतलाम, पत्रकार जनता और पुलिस व प्रशासन के बीच पुल का काम करता है। एक तरफ वह जनता की समस्याओं को पुलिस व प्रशासन के सम्मुख रखता है तो दूसरी तरफ पुलिस व प्रशासन में व्याप्त विसंगतियों व भ्र्ष्टाचार को उजागर कर सरकार और प्रशासन में बैठे उच्च अधिकारियों को प्रशासन को कुशलता से चलाने में मदद करता है।किन्तु रतलाम जिले में यह पुल खस्ताहाल हालत में है और उसके जिम्मेदार है पुलिस व प्रशासन में बैठे उच्च अधिकारियों का अहंकार जो जो जी हजूरी और चापलूसी के आदि होकर जिम्मेदार पत्रकारों के फोन उठाना अपनी शान में गुस्ताखी समझते है इस मामले में कलेक्टर रुचिका चौहान को को अपवाद मानना चाहिए क्योंकि कमोबेश वह हर फोन और मैसेज का जवाब पूरी जिम्मेदारी से देती है। लेकिन उनके बाद जिले में नम्बर दो का ओहदा रखने वाली ADM जमुना भिड़े के बारे में अधिकांश पत्रकारों की शिकायत है की वे फोन उठाने में तौहीन महसूस करती है खुद आज इस खबर के लेखक ने पत्रकारों की इस समस्या की तस्दीक के लिये ADM जमुना भिड़े को चार पांच बार फोन किया लेकिन उन्होंने मोबाइल नही अटेन्ड किया इसी तरह पुलिस अधीक्षक गौरव तिवारी के बारे में भी उनके मुंह लगे पत्रकारों को छोड़ दिया जाये तो ज्यादा तर की शिकायत है कि वे फोन नही उठाते दैनिक अवन्तिका के ब्यूरो चीफ ओम त्रिवेदी ने बताया कि उनके द्वारा कई मर्तबा किसी घटना की जानकारी के लिए SP को फोन लगाएगा गया लेकिन उन्होंने कभी भी फोन अटेंड नहीं किया। एक तरफ कमलनाथ सरकार प्रदेश से माफियाओं का खात्मा करने के लिए कटिबद्ध होने की बात करती है वहीं दूसरी तरफ इस सरकार के अधिकारी पत्रकारों के ही फोन नहीं उठाते जो कि पुलिस व प्रशासन की आंख और कान होते हैं तो कैसे तो माफियाओं का खात्मा होगा और कैसे जनता की समस्याओं का निवारण भगवान जानता है क्योंकि जब पत्रकारों के ही फोन नहीं उठाते तो जनता के फोन कोई कौन कैसे और कब उठाएगा भगवान ना करे रतलाम में कोई बड़ा ला एंड आर्डर का प्रश्न खड़ा हो गया तो कैसे क्या होगा।
