रतलाम। याचिकाकर्ता और सीआरपीएफ जवान संजीव कुमार के अधिवक्ता गौरव पांचाल ने बताया की सीआरपीएफ जवान संजीव कुमार, निवासी जिला पटना सीआरपीएफ मेंं सन 2014 मेंं भर्ती हुवे थे। भर्ती होने के पूर्व उन्हें किसी प्रकार की बीमारी नहीं थी और सीआरपीएफ के डाक्टरों ने संजीव कुमार को ड्यूटी के लिये फिट घोषित किया था जिसके बाद संजीव कुमार को ट्रेनिंग के दौरान सांस लेने मेंं तकलीफ हुई और बाद मेंं उन्हें सीआरपीएफ के डाक्टरों ने अस्थमा की बीमारी बताई और ट्रेनिंग के लिये अनफिट बता दिया। जिसके बाद सीआरपीएफ के कमांडेंट ने संजीव कुमार को सिविल सेवा नियमों को हवाला देकर जनवरी 2018 मेंं बर्खास्त कर दिया।
जिसके बाद संजीव कुमार द्वारा अधिवक्ता गौरव पांचाल के माध्यम से माननीय मप्र उच्च न्यायालय खण्ठपीठ इंदौर के समक्ष बर्खास्ती आदेश के विरुद्ध याचिका प्रस्तुत की जिसमें अधिवक्ता गौरव पांचाल द्वारा माननीय उच्च न्यायालय मेंं तर्क के दौरान बताया की जिस नियम का हवाला देकर सीआरपीएफ जवान को बर्खास्त किया गया हें वे नियम याचिकाकर्ता पर लागू नहीं होते हें और ना ही याचिकाकर्ता को सीआरपीएफ के मेडिकल बोर्ड ने नौकरी के लिये अयोग्य घोषित किया हें। अस्थमा की बीमारी कोई स्थाई बीमारी नहीं हें। जिसके कारन याचिकाकर्ता को सेवा से बर्खास्त किया जा सके।
अधिवक्ता गौरव पांचाल के तर्कों से सहमत होकर माननीय उच्च न्यायालय द्वारा कहा गया की याचिकाकर्ता को किसी सक्षम प्राधिकरण द्वारा अयोग्य घोषित नहीं किया गया हें इसलिए बर्खास्ती आदेश निरस्त किया जाता हें और सीआरपीएफ जवान की याचिका स्वीकार कर ली एवं उन्हें पुन: सेवा मेंं बहाल करने के आदेश दिये।
