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भारी पड़ा प्रकरण दर्ज नहीं करना, अब टीआई के खिलाफ ही दर्ज होगा अपराध

BySurendra Jain

Jul 1, 2017

रतलाम। जिले में पूर्व में पदस्थ रहे एक थाना प्रभारी को सड़क दुर्घटना का प्रकरण दर्ज नहीं करना और फरियादी के साथ ही बुरा बर्ताव करना महंगा पड़ गया है। न्यायालय ने उक्त टीआई के खिलाफ ही प्रकरण दर्ज करने के निर्देश दे दिए है, प्रकरण की जांच डीएसपी स्तर के अधिकारी द्वारा की जाएगी।

शनिवार को प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट महेन्द्रसिंह सोलंकी ने एक महिला द्वारा पेश परिवाद पर सुनवाई करने के बाद  बिलपांक थाने के प्रभारी रहे वरूण तिवारी के खिलाफ सीआरपीसी की धारा 156 (3) के तहत पुलिस थाना औद्योगिक क्षेत्र को एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए है।

एड्वोकेट संजय पंवार के अनुसार परिवादी संतोष पति दिनेश सिदौत निवासी विनोबा नगर ने तत्कालीन बिलपांक थाना प्रभारी वरुण तिवारी के विरुद्ध एक परिवाद पेश किया था। एड्वोकेट पंवार ने बताया कि परिवादी संतोष के पति दिनेश सिदौत बीएसएनएल में एसडीओ के पद पर खाचरौद में पदस्थ है तथा उनका परिवार रतलाम में निवास करता है। 26 फरवरी 2017 को अपने परिवार के साथ अपनी अल्टो कार एमपी 43 सी 7118 से रतलाम से बदनावर जा रहे थे, धराड़ के नजदीक ट्रक क्रमांक बीपी 32 पी 2117 में लापरवाही पूर्वक ट्रक चलाकर मारुति को टक्कर मार दी थी। मौके पर मौजूद लोगों ने ट्रक चालक की पिटाई कर दी तथा बिलपांक थाने को सूचना दी। सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिसकर्मी मुझे थाने पर ले गये वहां पर थाना प्रभारी उपस्थित नहीं थे। कुछ देर बाद थाना प्रभारी वहां पर आएं और कहां कि ट्रक ड्रायवर को आने दो और मेरे पति के साथ धक्का-मुक्की व झूमाझटकी कर चांटा मार दिया। परिवादी के पति व दो अन्य महिलाओं के विरुद्ध थाना प्रभारी ने प्रकरण दर्ज कर लिया। उसके बाद महिला संतोष सिदौत ने 28 फरवरी 2017 को पुलिस अधीक्षक रतलाम को लिखित आवेदन देकर घटना की जानकारी दी जिस पर पुलिस अधीक्षक ने आवश्यक कार्यवाही का आश्वासन दिया। जिसके पश्चात 20 मार्च 2017 को न्यायालय में परिवाद पेश किया गया जिस पर न्यायाधीश ने यह आदेश दिया।

 

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