खबर पक्की: 8 अप्रैल नई दिल्ली, सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि हर विधानसभा क्षेत्र में एक की बजाए पांच बूथों पर EVM-VVPAT का औचक मिलान होगा। 21 विपक्षी पार्टियों की याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा इस याचिका को लंबित नही रख सकते क्योंकि 11 अप्रैल से मतदान शुरू हो रहा है।दरसअल एक वकील ने सुनवाई के दौरान मांग की थी कि इस याचिका को लंबित रखा जाए। लोकसभा चुनाव में EVM से VVPAT के 50 फीसदी मिलान को लेकर 21 विपक्षी पार्टियों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी।याचिकाकर्ताओं ने कहा कि इसके लिए संसाधनों की समस्या क्यों होनी चाहिए? यह मामला चुनाव प्रणाली में विश्वास को लेकर है। चुनाव आयोग के पास ईवीएम के साथ VVPATs को गिनने और मिलान करने के लिए अधिक लोग होने चाहिए। ये व्यवस्था देश भर के 479 ईवीएम पर आधारित नहीं होना चाहिए बल्कि प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र में होनी चाहिए।
इस पर चुनाव आयोग ने दलील दी कि अधिक गिनती का मतलब मानव त्रुटि हो सकती है। चुनाव आयोग द्वारा निष्कर्ष एक तार्किक प्रक्रिया और प्रतिक्रिया पर आधारित हैं क्या याचिकाकर्ताओं द्वारा ऐसी कोई त्रुटि बताई गई है जिसके लिए कोर्ट के हस्तक्षेप की जरूरत हो। क्या यह सारा मामला सिर्फ धारणा सुधारने के लिए है? दलील सुनने के बाद प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि अगर 50 फीसदी ईवीएम और वीवीपैट का मिलान हो तो हर एक विधान सभा क्षेत्र में औसतन 175 बूथ होंगे। इस पर चुनाव आयोग ने कहा कि अब तक औचक गिनती में कोई खामी नहीं मिली है और कोई भी उम्मीदवार पीठासीन अधिकारी से गिनती की मांग कर सकता है।
