धर्म डेस्क। क्या आप जानते है, नवरात्रि वर्ष में 4 बार आती है। 24 जून से गुप्त नवरात्रि आरंभ हो रही है। 2 जुलाई तक चलने वाली नवरात्रि में यदि आप ये उपाय अपनाएंगे तो निश्चित ही माता की कृपा प्राप्त होगी और सुख-वैभव से आपको परिपूर्ण कर देगी। साधना के इन 9 दिनों में प्रत्येक सनातनी को नीचे दिए गए नियम अपनाना चाहिए।
- माता की पूजा ” लाल रंग के कम्बल ” के आसन पर बैठकर करना प्रकृष्ट माना गया है।
- साधको, योगियों, सिद्धि प्राप्त करने वालो के लिए ” कुश ” का आसन सर्वोत्तम होता है।
- माता के पूजन हेतु सोने चांदी कांसे के दीपक का उपयोग उत्तम होता है।
- माता की पूजा हेतु शुद्ध घी का दीप जलाना सर्वश्रेष्ठ होता है।
- तिल के तेल का दीपक मौली की बाती का उपयोग शुभ माना गया है।
- शत्रुओं से मुक्ति पाने के लिए सरसों व चमेली के तेल का दीपक जलाएं।
- माता के मंत्रों का जाप करने के लिए रुद्राक्ष अथवा लाल चन्दन की माला का प्रयोग करें।
- माता के बिशेष अनुष्ठान के समय सोने, चांदी, कांसा, तांबा और लोहे का दीपक अवश्य जलाना चाहिए।
- धन प्राप्ति हेतु माता के मंत्रो का जाप कमलगट्टे की माला से करना चाहिए।
- दीपक के नीचे ” चावल ” रखने से मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है तथा ” सप्तधान्य ” रखने से सभी प्रकार के कष्ट दूर होते है।
- घर में पूजा करते समय माता के सम्मुख 1 बाती का दीपक तथा विशेष अनुष्ठान के समय 9 बाती का दीपक जलाएं।
- अगर आप सक्षम है तो ” सोने के मनकों वाली माला ” से माता के मंत्रो का जाप करें।
- माता की पूजा करते समय ” गुडहल ” के फूल अवश्य अर्पित करें। इससे माता प्रसन्न होती है।
- नवरात्र पूजा के समय 9 दिन अखंड दीप प्रज्वलित करना चाहिए।
वर्ष में आते है ये 4 नवरात्रि
नवरात्र साल में 4 बार आते हैं, प्रथम चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से चैत्र शुक्ल दशमी तक जिसे बासन्तीय नवरात्र कहते हैं। दूसरे आश्विन शुक्ल प्रतिपदा से आश्विन शुक्ल दशमी तक जिसे शारदीय नवरात्र कहते है। इसके अतिरिक्त 2 गुप्त नवरात्र भी होते हैं। अषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा से अषाढ़ शुक्ल दशमी तक। दूसरे माघ शुक्ल प्रतिपदा से माघ शुक्ल दशमी तक गुप्त नवरात्र का समय होता है।
(ज्योतिषाचार्य प. अखिल दुबे रतलाम के अनुसार)
