खबर पक्की: जावरा के कुंदन कुटीर बाल आश्रय गृह यौन शोषण मामले में पुलिस ने जिस तरह प्रशासन की रिपोर्ट पर महज अपराधियों की गिरफ्तारी कर खाना पूरी की और कोर्ट में ना तो उनके रिमांड की मांग की न संदिग्ध जगहों पर ठिकानों पर छापे मारकर कोई जब्ती की उस से रतलाम की संवेदनशील जनता के मन में अनेक सवाल उठ रहे हैं कि जो पुलिस जरा सा चाक़ू पकड़ आने पर चोरी होने पर जेब कटी होने पर अपराधियों की पांच-पांच दिन की रिमांड मांग लेती है यहां तक कि जुआरी और सटोरियों की भी रिमांड ले लेती है तो फिर छोटे-छोटे बच्चों से इतना घिनौना कृत्य करने वाले अपराधियों और उनसे जुड़े तमाम लोगों को पकड़ने के लिए आखिर पुलिस किसके इशारे पर इन अपराधियों के साथ इतना संवेदनशील व्यवहार करते हुए इनकी रिमांड नहीं मांग रही है सब जानते हैं कि बगैर राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण के किसी की इतनी ताकत नहीं कि इन बच्चों के साथ इतना घिनौना कृत्य कर ले जब तक इन अपराधियों से जुड़े सारे तार नहीं जोड़े जाते तब तक इन बालिकाओं के साथ न्याय नहीं होगा। जिस रतलाम की मीडिया ने वर्तमान एसपी गौरव तिवारी को सिंघम बनाया इस मामले में उनकी इस कार्यशैली पर प्रश्नचिन्ह उठाते हुए बैंक ऑफ इंडिया से रिटायर्ड सूर्यप्रकाश दवे का कहना है इस मामले में जिस प्रकार की लचर कार्रवाई हो रही है उससे सिंघम की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिन्ह खड़े हो रहे है और मेरे नाम का उल्लेख कर आप उन तक यह बात पहुंचा देना। अब देखना है कि सिंघम अपनी सिंघम छवि को किस प्रकार बरकरार रख पाते हैं।
