खबर पक्की: रतलाम जिले की जावरा विधानसभा सीट इस बार दोनों दलों के लिए कुरुक्षेत्र बनी हुई है। भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार राजेंद्र पांडे जहां अपने पिता लक्ष्मी नारायण पांडे की विरासत बचाने के लिए तीसरी बार मैदान में है वहीं वंशवाद के खिलाफ भाजपा के ही बागी श्याम बिहारी पटेल भी अपना खूंटा गाड़े हुए हैं इसी तरह राजनीति में नितांत अजनबी के. के. सिंह कालूखेड़ा अपने भाई महेंद्र सिंह कालूखेड़ा के स्वर्गवास पश्चात महज इस बिना पर कांग्रेस की विरासत संभालने के लिए मैदान में है कि उनके भाई ने जिंदगी भर कांग्रेस की राजनीति की है और भाई होने की विशेष योग्यता की बिना पर ही कांग्रेस ने उन्हें जिंदगी भर कांग्रेस के झंडे डंडे उठाने वाले आम कांग्रेसियो पर तरजीह देते हुवे टिकिट दिया है। तिलहन संघ के पूर्व कर्मचारी के. के. सिंह कालूखेड़ा जो की अपने भाई महेंद्रसिंह कालूखेड़ा के कृषिमंत्री रहते मंडी बोर्ड में डेपुटेशन पर आये और फिर वही से वालेंटरी रिटायरमेंट लिया कांग्रेस संगठन या कांग्रेस की राजनीती में उनका कोई योगदान नही होने के बावजूद महज सिंधिया से नजदीकी और कालूखेड़ा का भाई होने से टिकिट भले ही उनको मिल गया पर पर कांग्रेस के कई जनाधार वाले नेता उनको छोड़ कर कांगेस के बागी डॉक्टर हमीर सिंह राठौड़ के पक्ष में प्रचार कर रहे है और इसके लिये पार्टी ने उनको बाहर का रास्ता दिखा दिया है। अल्प संख्यक नेता युसूफ कड़पा पूरी ताकत से उनका प्रचार कर रहे है इसी तरह पूर्व गृहमंत्री भारत सिंह, सुजान कोचट्टा,महेंद्र गंगवाल जैसे अनेको कांग्रेसी डॉक्टर हमीर सिंह के साथ है और अल्प संख्यक वोट के साथ जैन और स्वर्ण वोट जिसमे राजपूतो के वोट भी बड़ी संख्या में है यदि बागी हमीर सिंह खींचने में सफल हो गए तो के के सिंह का खेल बिगड़ सकता है क्योंकि सबसे बड़ा सहारा ही उनको राजपूत और अल्प संख्यक वोटो का है। इसी तरह भाजपा के बागी जिस तरह दिन पर दिन अपनी ताकत का प्रदर्शन कर रहे है उससे भाजपा प्रत्याशी राजेंद्र पांडे यदि आखरी दौर में पार नही पा पाये तो उनका भी खेल बिगड़ने में देर नही लगेगी। कुल मिलाकर दोनों राष्ट्रीय पार्टीयो की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। भाजपा के बागी श्याम बिहारी की पत्नी पूर्व में जहां निर्दलीय जीत कर भाजपा में शामिल हुई थी वही वर्तमान में खुद श्याम बिहारी पिपलोदा नगर पंचायत के अध्यक्ष है और पिपलोदा भाजपा की जीत में हर बार महत्वपूर्ण रोल अदा करता रहा है लेकिन पटेल के बागी होने से सारे समीकरण बिगड़ गये है। इसी प्रकार कांगेस के बागी हमीर सिंह की उच्च शिक्षित डॉक्टर होने और सार्वजनिक जीवन बेदाग होने से कांग्रेस और भाजपा के दोनों बागियों ने मुख्य पार्टीयो की नींद हराम कर रखी है इसके अलावा लोगो को ये भी लग रहा है की ये भले ही बागी है किन्तु एक वंशवाद के खिलाफत बगावत पर है तो दूसरा भाई भतीजा वाद के खिलाफ बगावत पर है और दोनों ही बागी यदि अप्रत्याशित परिणाम देते है तो रहेगे अपनी मूल पार्टी के साथ ही और दोनों ही बागी बात चीत में यह स्वीकार भी करते है इसलिये ज्यादातर लोगो का यह मानना है की परिणाम चाहे जो हो उनका वोट व्यर्थ नही जाएगा। इसी प्रकार भाजपा प्रत्याशी को राजेंद्र पांडे को विंड कम्पनी से नाराज किसानों की नाराजगी से फर्क पड़ सकता है तो के के सिंह को कृषि विज्ञान केंद्र कालूखेड़ा में हुई अनियमितताओं और उससे स्थानीय किसानों को लाभ नही होने से क्षेत्र के किसान की नाराजगी यदि वोट में परिवर्तित होती है तो कांग्रेस की सम्भावनाओ को क्षति पहुंचेगी।
