खबर पक्की: पश्चिमी रेलवे के रतलाम डिविजन के डीआरएम आरएम सुनकर कि कार्य क्षमता की जितनी तारीफ की जाए कम है। आज अवंतिका उज्जैन के रतलाम ब्यूरो चीफ पत्रकार ओम त्रिवेदी इलाज करवाकर बड़ौदा से रतलाम लौट रहे थे। बड़ौदा से उनका फोन पत्रकार सुरेंद्र जैन के पास पहुंचा के यहां बड़ौदा में जनता एक्सप्रेस में जिस कोच में उनका रिजर्वेशन था S8 वह लगा नहीं है इस पर पत्रकार सुरेंद्र जैन द्वारा डीआरएम आरएम सुनकर को 4:35 पर फोन लगाया और ओम त्रिवेदी जी की पूरी डिटेल दी 4:40 पर ओम त्रिवेदी जी के पास फोन भी पहुंच गया और साथ में जनता एक्सप्रेस पर चल रहा TTE भी पहुंच गया और उन्हें बताया कि कुछ लोगों ने S7 से लगे हुए कोच से रिजर्वेशन वाली नेम प्लेट और एस 8 का बोर्ड निकाल दिया था। और इस कारण से उस आरक्षित कोच में काफी सारे अनारक्षित यात्री चढ़ गए थे टीटी ने उन सब को निकाल कर ओमजी त्रिवेदी को उनकी सीट तक पहुंचाया। बाद में ओम जी ने फोन करके बताया कि गोधरा में भी दो-तीन रेलवे कर्मचारी आए और उनसे पूछा कि कोई तकलीफ तो नहीं है साथ ही गोधरा के अंदर उन्होंने उस कोच पर आरक्षित कोच लिखवाया और एस 8 का बोर्ड भी लगवाया ताकि अनारक्षित यात्री उसमें प्रवेश नहीं कर पाए 4:35 के फोन पर 5 मिनट में डीआरएम जैसी महत्वपूर्ण पोस्ट पर बैठे व्यक्ति द्वारा इतनी त्वरित गति से कार्रवाई करना निश्चित ही बहुत ही प्रशंसनीय और अनुकरणीय कार्य है। अगर प्रत्येक सरकारी अधिकारी और कर्मचारी इस प्रकार काम करने लगे तो देश के अंदर कोई समस्या ही नहीं बचे। 25 सालों में बहुत सारे डीआरएम रतलाम डिविजन में आए और गए पर जो छाप डीआरएम सुनकर छोड़कर जाएंगे ऐसी छाप अभी तक कोई भी छोड़ कर नहीं गया।
