सम्पादकीय…
खबर पक्की: केरल के सबरीमाला प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद महिलाओं के साथ लिंग भेद खत्म होने की उम्मीद बंधी थी। और बराबरी का दर्जा मिलने की उम्मीद जागी थी। लेकिन जिस तरह भाजपा सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करने के बजाए केरल में अयप्पा भक्तों को हवा देकर कानून और व्यवस्था की स्थिति पैदा कर रही है उसको देख कर लगता है कि भाजपा को महिला सशक्तिकरण से कुछ भी लेना देना नहीं है। उसका तो एकमात्र लक्ष्य येन केन प्रकारेण चुनाव में वोट कबाड़ना है। एक तरफ भाजपा जहां सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देकर मुस्लिम महिलाओं के वोट कबाड़ ने के लिए तीन तलाक को अवैध ठहराती है और उसके लिए कानून बनाती है। और ढिंढोरा यह पिटती है जैसे मुस्लिम महिलाओं का उससे बड़ा कोई हितेषी नहीं है। हाजी अली मस्जिद और शनि शिगनापुर मंदिर में भी महिलाओं को प्रवेश नहीं करने दिया जाता था वहां भी सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ही प्रवेश चालू हुआ वहां भी भाजपा ने इसका समर्थन किया क्योंकि मुस्लिम महिला वोट बड़ी संख्या में हाजी अली मस्जिद में महिलाओं के प्रवेश करने पर उसे मिल सकते थे जबकि शनि शिगनापुर मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर उसे कोई बहुत ज्यादा फर्क नहीं पड़ना था। लेकिन अब जबकि लोकसभा चुनाव में 8 महीने से भी कम का वक्त बचा है। भाजपा धार्मिक मुद्दों को हवा देकर येन केन प्रकारेण हवा को फिर अपने पक्ष में मोड़ना चाहती है। भाजपा को न तो देश के सुप्रीम कोर्ट की चिंता है ना महिलाओं की चिंता है। उसे चिंता है तो सिर्फ अपनी सत्ता बनाए रखने की अपना वोट बैंक बनाए रखने की। यही कारण है कि एससी एसटी एक्ट में सुप्रीम कोर्ट के एक अच्छे फैसले के बावजूद sc-st के वोट कबाड़ने के लिए। उसने अपने आप को sc-st का हमदर्द बताने के लिए सुप्रीम कोर्ट के फैसले को बदल दिया और एक संतुलित कानून को एक तरफा बना दिया सिर्फ वोट के लिए। जिस राम मंदिर आंदोलन ने भाजपा को 2 से 272 तक पहुंचाया वह भी सिर्फ उनके लिए सत्ता तक पहुंचने का जरिया ही है। राम और राम मंदिर के प्रति यदि भाजपा इतनी ही समर्पित है तो क्यों नहीं संसद में कानून लाकर राम मंदिर का टनटा हमेशा के लिए खत्म कर दिया जाता। लेकिन भाजपा इस मुद्दे को जीवित रखना चाहती है। क्योंकि जितना लंबा यह मुद्दा चलेगा उसे सरकार बनाने और बचाए रखने में उतनी ज्यादा मदद मिलेगी। रोजगार के मुद्दे पर, भ्रष्टाचार के मुद्दे, पर देश के पड़ोसियों से अच्छे संबंधों के मुद्दे, पर विकास के मुद्दे, पर रोजगार के मुद्दे पर देश की जनता ने भाजपा को चुना था लेकिन चुनाव आते-आते वे सारे मुद्दे हवा हो गए और वापस धर्म और राजनीति का घाल मेल शुरू हो गया धर्म और राजनीति का घालमेल देश का बेड़ा गर्क कर देगा। सबरीमाला प्रकरण पर जिस तरह सुप्रीम कोर्ट के फैसले को दरकिनार कर भाजपा संगठन हवा दे रहा है। उससे तो यही लगता है कि उसका एकमात्र लक्ष्य चुनाव है चाहे उसके लिए उसे कुछ भी करना पड़े। उसे ना तो मुस्लिम महिलाओं के उत्थान की चिंता है ना हिंदू महिलाओं के उत्थान की उसे सिर्फ चिंता है अपने उत्थान की।
