खबर पक्की: रतलाम नगर निगम की नजर में जीवन का कोई मोल नहीं है जी हां उसकी कार्यप्रणाली से तो बिल्कुल यही परिलक्षित होता है। पिछले साल भी इन्हीं दिनों में धूल नहीं उड़ने देने के लिए कोर्ट रोड पर 3 महीने तक इसी तरह जल की बर्बादी नगर निगम ने की थी और अब फिर छत्री पुल के दोनों कोने पर मोरम डालने के बाद उड़ती धूल को कलेक्टर की फटकार के बाद रोकने के लिए फिर जल रूपी जीवन की व्यर्थ बर्बादी हो रही है। नगर निगम में हमने उच्च शिक्षित महापौर को इसलिए चुना था कि वह नौकरशाही को काबू में रखेगी और नगर के हित में काम करवाएगी किंतु लगता है कि जनता ने जिन आशा और अपेक्षाओं को ध्यान में रखकर महापौर को महापौर बनाया था वह सब शहर की सड़कों की धूल में धूसरित हो रही है। हमने कई अच्छे निगमायुक्त भी देखें और कई नाकारा और ना काबिल भी देखें लेकिन लगता है कि उन सारे नाकारा और ना काबिल का रिकॉर्ड तोड़ने के लिए बहुत लालायित है वर्तमान निगम आयुक्त। पूर्व कलेक्टर तनवी सुंद्रियाल निगमायुक्त को बहुत फटकार फटकार के काम करवाया था और वर्तमान कलेक्टर रुचिका चौहान भी अब समझ गई है कि इन से कैसे काम लेना चाहिए । लेकिन लगता है कि लगातार फटकार खाने के बाद फटकार का भी असर इन पर से खत्म होता जा रहा है और उन्होंने ठान लिया है के रत्न पूरी को पूरा लौहपूरी बना कर ही छोडूंगा। तभी तो थोड़ा सा डामरीकरण करके रोड को सही करने की जगह कीमती जल रुपी जीवन को वे इस तरह बर्बाद करने पर तुले हुए हैं।आप देख सकते हैं कि टैंकर के पीछे लिखा है जल ही जीवन है और जीवन का कोई मोल नहीं है तभी इसे सड़कों पर इस तरह बहाया जा रहा है। जय रतलाम नगर निगम जय महापौर और जय निगम परिषद। भगवान इनका भला करें।
