खबर पक्की : कल का ऐतिहासिक जावरा बंद कई नए सवालों को जन्म दे गया तो कई सवालों के जवाब इस बंद से मिल भी गए। SC ST act के विरोध में हुए जावरा बंद ने जहां इस सवाल को जन्म दिया कि क्या सत्तारूढ़ दल की जमीन दरक रही है क्योंकि दो दर्जन विधायक और सांसद सहित रतलाम और मंदसौर जिले का पूरा संगठन अमित शाह की सभा के लिए तैयारी कर रहा था सरकार और संगठन की पूरी ताकत लगाने के बावजूद बड़े पैमाने पर इतनी तैयारी के बावजूद और आसन्न चुनाव को देखते हुए भाजपा के सबसे शक्तिशाली और ताकतवर अध्यक्ष की सभा में आधी कुर्सियां खाली रह जाना काफी कुछ कह जाता है मंच पर उपस्थित मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह सहित संगठन और सरकार के लोगों की शारीरिक भाव भंगिमा इस बात को भलीभांति बयान कर रही थी। SC ST act मैं किया गया संशोधन भाजपा के गले की हड्डी बन गया है अब उसे न निगलते बन रहा है ना उगलते। वहीं इस ऐतिहासिक बंद ने सत्तारूढ़ दल की मनमानियां से निबटने के लिए जनता को एक समाधान प्रस्तुत कर दिया है की राजनेता भीड़ से बनते हैं और अगर भीड़ नहीं हो तो राजनेता और राजनीति दोनों खत्म हो जाती है। मुट्ठी भर युवा साथी बंद का आव्हान करते हैं और जनता खुद-ब-खुद एक दूसरे से जुड़ते हुए सभी समाजों को एक दूसरे के निकट ले आती है और दूर की कौड़ी नजर आ रहा बंद ऐतिहासिक बंद में तब्दील हो जाता है फिल्म उमराव जान की गाने की पंक्तियां इस बंद पर फिट बैठती है कि मुश्किल नहीं है कुछ भी अगर ठान लीजिए। इस बात से हमारे कांग्रेसी मित्रों को भी बहुत उत्साहित होने की जरूरत नहीं है क्योंकि जब उनके नेता आएंगे तब भी यह विरोध बरकरार नजर आएगा क्योंकि यह विरोध किसी एक पार्टी या किसी नेता का नहीं है यह विरोध उस व्यवस्था का है जो वोट की खातिर एक दूसरे से बेर करवाती है एक को ऊंचा दूसरों को नीचा दिखाती है एक के साथ न्याय करने के नाम पर दूसरे के साथ बड़ा अन्याय करने के लिए न्यायपालिका के फैसले को खूंटी पर टांग देती है जिन सांसदों को हम चुनकर भेजते हैं वे चुन चुन कर सवाल पूछने के बजाय मुंह में मूंग भरकर चुप हो जाते हैं लोकतंत्र पार्टी तंत्र में बदल गया है पार्टी की लाइन के विरोध में आप बोलोगे तो आप पार्टी विरोधी हो जाओगे आप देशद्रोही हो जाओगे आप दलित विरोधी हो जाओगे आप आदिवासी विरोधी हो जाओगे मैं सेल्यूट करता हूं sc-st के सांसदों को जो अपनी जातियों के लिए वह संसद में कानून में बदलाव के लिए लड़ाई लड़ रहे थे क्योंकि वह sc-st सीट से जीत कर आए थे वह उन्हीं की नुमाइंदगी के लिए आए थे तो अगर उनकी नुमाइंदगी के लिए वह उनके फेवर की बात करें तो इसमें बुरा क्या है किंतु आश्चर्य हमें इस बात का होता है कि हमारे स्वर्ण सांसद क्या कर रहे थे जो स्वर्ण समाज पूरे देश की अर्थव्यवस्था को अपने कंधों पर लेकर तमाम कल्याणकारी योजनाओं के लिए टैक्स देता है व्यापार धंधे उद्योग के मार्फत देश के विकास में योगदान देता है क्या उनके लिए उनकी कोई जिम्मेदारी नहीं है क्या हम सब ऊपर से आए हैं अरे जाति और रंगभेद कहां नहीं है अमेरिका चले जाइए इंग्लैंड चले जाइए अफ्रीका चले जाइए ऑस्ट्रेलिया चले जाइए वहां रंगभेद है तो यहां जाति भेद है किंतु वहां का कानून उठाकर देख लीजिए और अपने यहां का कानून उठाकर देख लीजिए कहीं पर भी कुछ भी साबित होने के पहले गिरफ्तारी का प्रावधान नहीं है और न्याय कहता भी यही है 99 गुनहगार भले छूट जाए पर एक बेगुनाह को सजा नहीं होना चाहिए। कल जावरा से उठी चिंगारी कहीं शोला ना बन जाए इसलिए वक्त है अभी भी पार्टियों के पास कि कुछ ठोस और न्याय पूर्ण लेकर चुनाव के मैदान में उतरे नहीं तो जनता आसमान पर बिठा ती है तो जमीन पर लाने में भी देर नहीं करतीहै। सभी पार्टियों के लिए मेरा इतना ही कहना है की इब्तिदा(शुरुआत) है क्रांति रोता है क्या, आगे आगे देखिए होता है क्या।
