खबर पक्की: कृषि विज्ञान केंद्र कालूखेड़ा इन दिनों भ्रष्टाचार का अड्डा बन गया है। पूर्व कृषि मंत्री महेंद्र सिंह कालूखेड़ा के अथक प्रयासों से स्थापित कालू खेड़ा स्थित कृषि विज्ञान केंद्र जो की जिले का एकमात्र कृषि विज्ञान से संबंधित केंद्र है को इन दिनों कु प्रबंध की कु नजर लगी हुई है। एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किसानों की आय दोगुनी करने के लिए 2022 तक का लक्ष्य तय कर जुटे हुए हैं वहीं दूसरी ओर किसानों की उन्नति से संबंधित इस कृषि विज्ञान केंद्र में भाई भतीजा वाद और स्वार्थ के बोल बाले के कारण जिले के कृषकों को कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है। कृषि विज्ञान केंद्र को जिला कलेक्टर से प्राप्त 100 बीघा कृषि भूमि को वैज्ञानिक और उन्नत खेती के उपयोग में लेने के बजाय उक्त भूमि को नीलाम कर दिया जाता है । इस कृषि कार्य के लिए फार्म हाउस मैनेजर की नियुक्ति कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा कर रखी है फार्म को मैनेज करने के लिए लाखों रुपया खर्च कर आवास भी फार्म पर बना रखा गया है उस फार्म के देखरेख पर भी वार्षिक खर्च होता है किंतु फार्म हाउस मैनेजर डीआर पचौरी फार्म नीलाम कर देने के कारण उनकी देखरेख करने के बजाय प्रबंधन की चापलूसी और चमचागिरी में लगे रहते है। कृषि विज्ञान केंद्र कालूखेड़ा के चेयरमैन महेंद्र सिंह कालूखेड़ा थे किंतु अचानक उनकी मृत्यु उपरांत इसका प्रबंधन योग्य हाथों में जाने के बजाय भाई भतीजा वाद के आधार पर उन्हीं के परिवार के लोगों द्वारा हथिया लिया गया इस कारण इस केंद्र की दुर्दशा प्रारंभ हो गई। केंद्र सरकार के कृषि मंत्रालय से भारी अनुदान प्राप्त करने वाला यह केंद्र कृषकों के हितों में काम करने की जगह निजी लाभ का अड्डा बन गया है यहां होने वाली नियुक्तियों की भी जांच की जाए तो तब पता चलेगा कि नियुक्तियां योग्यता के आधार पर नहीं वरन निजी लाभ के आधार पर की जा रही है जिला कलेक्टर को किसी योग्य अधिकारी से इस केंद्र की पूरी जांच करवाकर कृषि मंत्रालय को इस बारे में रिपोर्ट भेजना चाहिए ताकि केंद्र के अनुदान से चलने वाले इस केंद्र का उपयोग कृषकों के हित में किया जा सके।
