Khabar Pakki: किसी विवाहित महिला से किसी गैर मर्द के संबंध बनाना उसके सहमति से अब अपराध नहीं माना जाएगा भारत के सुप्रीम कोर्ट के 5 जजों की संविधान पीठ ने भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 497 को अवैध घोषित कर दिया है इस धारा के अंतर्गत किसी विवाहित महिला से किसी गैर मर्द से संबंध बनाने पर उस पुरुष के खिलाफ मुकदमा कायम कर दिया जाता था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पति महिला का मालिक नहीं हो सकता लेकिन तलाक लेने के लिए यह आधार बराबर बना रहेगा सुप्रीम कोर्ट का कहना था कि धारा 497 महिला के व्यक्तित्व पर धब्बा है और यह समानता के कानून के खिलाफ है। हर बात में राष्ट्रवाद और संस्कृति की दुहाई देने वाली मोदी सरकार और आर एस एस के लिए धारा 377 के बाद 497 का रद्द होना एक झटका है। भारतीय न्यायपालिका के जिस तरह से फैसले आ रहे हैं उससे लगता है कि पूरब अब पश्चिम के तर्ज पर बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है।
