ख़बरपक्की:आदिवासियों की जमीन खरीद फरोख्त मामले पर शंकाओं के बादल मंडराने लगे है पहले जहां ऐसा महसूस हो रहा था की प्रशासन आदिवासियों की जमीन खरीद बेच करने वालों पर शिकंजा कसने वाला है और नियमों को तोड़ मरोड़ कर आदेश करने वाले अधिकारियों पर कार्यवाही होगी लेकिन प्रशासन की अभी तक की कार्यवाही से जो भरोसा बनना चाहिए वह नही बनते हुवे शंकाओं के घने बादल छाने लगे है शंका पैदा होने का सबसे बड़ा कारण ये है की न तो जिला प्रशासन और न ही सम्भाग आयुक्त द्वारा अभी तक पंजीयक को लिखित में पंजीयन रोकने के आदेश भेजे गये है।जिला कलेक्टर से जब इस सबंध में जानकारी मांगी तो उन्होंने कहा की हमने पुनरावलोकन के लिये लिखा था किंतु हमे अनुमति नही मिली और अब जो भी कार्यवाही होना है वह संभाग आयुक्त कार्यालय से ही होना है।इधर आज संभाग आयुक्त से चर्चा की और उन्हें बताया कि इतने दिनों बाद भी पंजीयन रोकने तक के आदेश आपके न्यायालय से जारी नही हुवे तो उनका जवाब था की में पता करवाता हु जबकी तात्कालिक रूप से इतने संवेदनशील मामले के बारे में तो उनको हर जानकारी मुँह जबानी याद होना चाहिए। जब हमने पूछा की आगे इस मामले में आप क्या कर रहे हो तो उनका जवाब था कि सारे मामले अपील में लेकर नोटिस जारी करेंगे अब यह समझ से बाहर है की इन मामलों में अपील करेगा कोन और आज तक तो पंजीयन रोकने के ही आदेश नही हुवे तो नोटिस कब जारी होंगे या जैसी की जनचर्चा है सारी कवायद हवा हवाई है और सिर्फ खरीदारों पर दबाव बनाकर अपना उल्लू सीधा करने का खेल है।यदि उच्च स्तर पर सरकार गम्भीर है तो उसे इन चर्चाओं पर लगाम लगाने के लिये तुरंत कार्यवाही करना चाहिए।
