खबर पक्की, 28 सितंबर, रतलाम। कलेक्टर अजय कटेसरिया ने स्वामित्व योजना अंतर्गत तैयार खसरा एवं अन्य भू-अभिलेखों में हुई गलत अशुद्ध अथवा अनाधिकृत प्रविष्टियों की त्रुटियों का सुधार करने के निर्देश दिए हैं। कलेक्टर ने जिले के सभी अनुविभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया है कि स्वामित्व योजना के अंतर्गत तैयार अभिलेखों में यदि किसी प्रकार की त्रुटि पाई जाती है तो निर्धारित वैधानिक प्रक्रिया के अनुसार उसका सुधार किया जाए।
कलेक्टर द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 113 का क्षेत्र धारा 108 के अंतर्गत तैयार अधिकार अभिलेख में लिपिकीय त्रुटियों तथा ऐसी त्रुटियों के सुधार तक सीमित है जिन्हें हितबद्ध पक्ष स्वीकार करते हों। प्रत्येक प्रकार के भू-अभिलेख की त्रुटि का सुधार धारा 113 के अंतर्गत नहीं किया जा सकता।
धारा 115(1) के अनुसार भू-अधिकार पुस्तिका तथा अधिकार अभिलेख को छोड़कर धारा 114 के अंतर्गत तैयार भू-अभिलेखों में गलत अशुद्ध अथवा अनाधिकृत प्रविष्टियों के सुधार की शक्ति उपखंड अधिकारी में निहित है। उपखंड अधिकारी स्वप्रेरणा से अथवा व्यथित व्यक्ति के आवेदन पर आवश्यक जांच कर ऐसी प्रविष्टियों का सुधार कर सकते हैं।
धारा 115(1) के अनुसार भू-अधिकार पुस्तिका तथा अधिकार अभिलेख को छोड़कर धारा 114 के अंतर्गत तैयार भू-अभिलेखों की गलत अशुद्ध अथवा अप्राधिकृत प्रविष्टियों के सुधार की शक्ति उपखंड अधिकारी में निहित है। उपखंड अधिकारी स्वप्रेरणा से अथवा व्यथित व्यक्ति के आवेदन पर आवश्यक जांच कर ऐसी प्रविष्टियों का सुधार कर सकते हैं।
अभिलेख तैयार करने में ड्रोन अथवा अन्य तकनीक का उपयोग किए जाने से उसकी विधिक श्रेणी परिवर्तित नहीं होती। सुधार की धारा का निर्धारण अभिलेख के नाम मात्र अथवा योजना के नाम से नहीं, बल्कि उस अभिलेख को तैयार एवं प्रकाशित करने वाले वैधानिक प्रावधानों से होगा।
धारा 123 के अंतर्गत निर्दिष्ट जमाबंदी/खतौनी को अधिकार अभिलेख माने जाने का प्रावधान, धारा 108 के अनुसार अधिकार अभिलेख तैयार होने तक की व्यवस्था है। इससे प्रत्येक वर्तमान खसरा स्वत: अधिकार अभिलेख नहीं बनता; साथ ही धारा 108 के अंतर्गत विधिवत तैयार नए अभिलेख का अधिकार अभिलेख होना भी निषिद्ध नहीं होता।
फलत: स्वामित्व योजना का वह खसरा अथवा अन्य भू-अभिलेख जो धारा 114 के अंतर्गत तैयार है, उसकी प्रामाणिक त्रुटियों का सुधार धारा 115 के अंतर्गत किया जाना विधिसम्मत है।
स्वामित्व योजना अंतर्गत तैयार खसरा एवं धारा 114 के अन्य पात्र भू-अभिलेखों में गलत, अशुद्ध अथवा अप्राधिकृत प्रविष्टियों के सुधार के प्रकरण संबंधित उपखंड अधिकारी द्वारा संहिता की धारा 115 के अंतर्गत ग्रहण कर, गुण-दोष के आधार पर निराकृत किए जाएँगे।
कार्यवाही से पूर्व यह सुनिश्चित किया जाए कि सुधार हेतु प्रस्तुत अभिलेख धारा 115 की परिधि में आता है। इस प्रयोजन के लिए अभिलेख का निर्धारित प्ररूप, निर्माण का वैधानिक आधार, अंतिम प्रकाशन तथा संबंधित मूल आदेश का परीक्षण किया जाए। अभिलेख की विधिक श्रेणी के संबंध में आदेश में स्पष्ट निष्कर्ष अंकित किया जाए।
जांच और सुनवाई के बाद होगा सुधार
कलेक्टर ने निर्देश दिए कि किसी प्रविष्टि के सुधार का आदेश पारित करने से पूर्व संबंधित तहसीलदार की लिखित रिपोर्ट प्राप्त की जाए तथा सभी हितबद्ध पक्षों को सूचना देकर सुनवाई का अवसर दिया जाए। आवश्यकतानुसार मूल सर्वे अभिलेख, ड्रोन मानचित्र, स्थल सत्यापन, पूर्व अभिलेख एवं उपलब्ध दस्तावेजों का परीक्षण कराया जाए।
कलेक्टर की मंजूरी पर ही पांच वर्ष से पूर्व की प्रविष्टियों में होगा सुधार
पांच वर्ष की कालावधि से पूर्व की किसी प्रविष्टि के सुधार की कार्यवाही कलेक्टर की लिखित मंजूरी प्राप्त किए बिना प्रारंभ नहीं की जाए। शासन का हित अंतर्विष्ट हो, वहाँ उपखंड अधिकारी धारा 115(2) के परंतुक के अनुसार प्रकरण कलेक्टर को प्रस्तुत करेगा। ऐसे प्रकरण में धारा 115(3) के अनुसार कलेक्टर द्वारा आवश्यक जाँच एवं आदेश किया जाएगा।
सुधार स्वीकार अथवा अस्वीकार करने का कारण दर्ज हेागा
कलेक्टर ने निर्देश दिए कि सुधार स्वीकार अथवा अस्वीकार करते समय कारणयुक्त आदेश पारित किया जाए। सुधार स्वीकार होने पर मूल प्रविष्टि, त्रुटि का आधार एवं संशोधित प्रविष्टि स्पष्ट रूप से अंकित हों। स्वीकृत सुधार उपखंड अधिकारी द्वारा अधिप्रमाणित किया जाए तथा उसके अनुरूप संबंधित पात्र अभिलेख में प्रविष्टि कर अनुपालन सुनिश्चित किया जाए।
स्वामित्व योजना में हुई त्रुटियों का सुधार करेंगे सभी एसडीएम : कलेक्टर, निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई के दिए निर्देश
