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अगर यह अनुशासनहीनता है, तो ऐसी अनुशासन हीनता हर दिन होना चाहिए तभी पार्टी बचेगी और लोकतंत्र बचेगा।

BySurendra Jain

Jul 18, 2018

ख़बरपक्की।कल वार्ड no 5 की पार्षद इंदू बाला गोखरू अपने वार्ड के 40,50 लोगों के साथ कीचड़ से वार्ड के लोगो की नर्क होती जिंदगी को बताने और उनकी समस्या हल करवाने के लिये महापौर से मिलने नगरनिगम पहुँची बात होने के बावजूद जब महापौर समय पर नगरनिगम नही पहुँची तो उन्हीने पार्षद जाकिर रावटीवाला और सीमा टांक को बुलाकर समस्या बताई और सभी के साथ महापौर कक्ष के बाहर नीचे जमीन पर बैठ कर विरोध जताया जिसे भाजपा के जिलाध्यक्ष कानसिंह चौहान ने अनुशासन हीनता बताया है। माननीय अध्यक्ष जी अनुशासन हीनता तो वह है जो जनता की सेवा की बात कर सत्ता में आये लेकिन उन्हें नारकीय जीवन जीने को विवश देख कर भी जिनका दिल नही पसीज रहा है। अनुशासन हीनता वह है जो पंचायत से लगाकर दिल्ली तक अपनी सत्ता होने के बावजूद यह कहे की आयुक्त बड़े पॉलिटिशियन है मेरी सुनते नही है।अनुशासन हीनता वह है जो नियम कायदे से सदन चलाने के लिये नगरनिगम का सम्मेलन नही बुलाते बजट पास नही करते उस पर चर्चा नही करते। जिस पार्टी को अटलबिहारी जैसे जननेता ने खड़ा किया हो,जिस पार्टी के प्रधानमंत्री कहते हो नेशन फर्स्ट पार्टी सेकंड उसी पार्टी के पार्षद यदि जनता के दुख दर्द के लिये महापौर कक्ष के बाहर जमीन पर बैठ गए तो आपको तो उनकी पीठ थपथपा कर उन्हें आशीर्वाद देना चाहिए कि उन्होंने अच्छा काम किया जो जनता के दुख मेंअनुशासन अपनी ही महापौर के खिलाफ खड़े होकर सही का साथ दिया। आपको सही गलत बताना हमारा काम नही पर जनता का साथ देने वाले पार्षद अनुशासन हीन है तो लोकतंत्र में ऐसी हीनता की उम्मीद प्रत्येक जनता अपने जनप्रतिनिधि से करती है। पार्टी अनुषा के नाम पर जनता की आशा अपेक्षा पर खरे उतरने की कोशिश करनेवाले जनप्रतिनिधियों को हतोत्साहित मत कीजिए नही तो जनता की सुनने वाला कोई नही बचेगा।

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