खबर पक्की, 22 सितंबर, रतलाम। प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी गायत्री परिवार रतलाम शाखा द्वारा श्राद्धपक्ष के दौरान शहर के विभिन्न स्थानों पर नि:शुल्क श्राद्ध-तर्पण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। अखिल विश्व गायत्री परिवार के केंद्र गायत्री तीर्थ शांतिकुंज हरिद्वार के मार्गदर्शन में संस्कार परंपरा के पुनर्जीवन के उद्देश्य से यह आयोजन किए जा रहे हैं। पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य के उद्घोष पितरों को श्रद्धा दीजिए, वो आपको शक्ति देंगे से प्रेरित होकर गायत्री परिवार द्वारा पिछले कई वर्षों से श्राद्ध-तर्पण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
गायत्री परिवार नगर ट्रस्ट रतलाम के मुख्य ट्रस्टी पातीराम शर्मा ने बताया कि इस वर्ष रतलाम शहर में अलग-अलग तिथियों पर श्राद्ध-तर्पण कार्यक्रम होंगे। 27 सितंबर रविवार को गायत्री ज्ञान चेतना मंदिर काटजू नगर, 2 अक्टूबर शुक्रवार को सैलाना रोड बरबड़ स्थित बड़ा हनुमानजी मंदिर, 4 अक्टूबर रविवार को श्रीरामकृष्ण विवेकानंद आश्रम जवाहर नगर तथा 10 अक्टूबर शनिवार को सर्वपितृ अमावस्या के अवसर पर गायत्री शक्तिपीठ डोंगराधाम कॉलोनी (शंकरगढ़) में कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।
सभी स्थानों पर कार्यक्रम का समय सुबह 9 से 11 बजे तक रहेगा। श्रद्धालुओं से भारतीय संस्कृति के अनुरूप वेशभूषा में आने का आग्रह किया गया है। प्रतिभागियों को कार्यक्रम स्थल पर निर्धारित समय से आधा घंटा पहले पहुंचकर नि:शुल्क पंजीयन कराना होगा। श्राद्ध-तर्पण के लिए आवश्यक पूजन सामग्री की व्यवस्था गायत्री परिवार द्वारा की जाएगी।
कोई भी परिजन कर सकता है तर्पण
गायत्री परिवार के जिला समन्वयक दामोदर प्रसाद शर्मा ने बताया कि दिवंगत परिजनों की स्मृति एवं शांति के लिए परिवार का कोई भी सदस्य, जैसे पुत्र-पुत्री, भाई-बहन अथवा पति-पत्नी श्रद्धाभाव से श्राद्ध-तर्पण कर्म में सहभागिता कर सकता है। आयोजन में वैदिक परंपरा के साथ सामाजिक समरसता का भी ध्यान रखा जाएगा।
मिण्डेश्वर तीर्थ पर 4 अक्टूबर को बड़ा आयोजन
रतलाम जिले में अन्य स्थानों पर श्राद्ध-तर्पण के इच्छुक श्रद्धालु अपने निकट के गायत्री परिवार प्रज्ञा संस्थान अथवा शाखा से संपर्क कर सकते हैं। गायत्री परिवार की जावरा, रिंगनोद, रोला, कलालिया और गोदीधर्मसी शाखाओं द्वारा स्थानीय परिजनों के सहयोग से रविवार 4 अक्टूबर को संगम स्थल मिण्डेश्वर तीर्थ (मिंडा जी) पर बड़े स्तर पर श्राद्धकर्म कराया जाएगा। यहां हर वर्ष सैकड़ों श्रद्धालु शामिल होते हैं और कई पारियों में श्राद्ध-तर्पण कार्यक्रम संपन्न कराया जाता है।
