खबर पक्की : 2 जुलाई रतलाम,जामन पाटली 1800 हैकटेयर क्षेत्र में विकसित किए जा रहे औद्योगिक क्षेत्र के प्रदूषित जल निकासी व्यवस्था के संबंध में यह चिंता व्यक्त करना जरूरी है कि यदि समय रहते इस विषय पर उचित ध्यान नहीं दिया गया, तो भविष्य में गंभीर पर्यावरणीय और जनस्वास्थ्य संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
रतलाम शहर को पेयजल उपलब्ध कराने वाला एक मात्र धोलावड़ बांध मुख्य रूप से जामड़ नदी के जलग्रहण क्षेत्र पर निर्भर है। यदि औद्योगिक क्षेत्र से निकलने वाला दूषित एवं अपशिष्ट जल बिना उचित शोधन व्यवस्था के छोड़ा गया, तो वह जामड़ नदी से होते हुए धोलावड़ बांध तक पहुंच सकता है। इससे बांध का जल प्रदूषित होने की आशंका है तथा रतलाम की जनता को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना कठिन हो सकता है।
अतः जनहित एवं पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए यह सुनिश्चित किया जाए कि औद्योगिक क्षेत्र का दूषित जल एवं अपशिष्ट किसी भी स्थिति में जामड़ नदी के माध्यम से धोलावड़ बांध तक न पहुंचे। इसके लिए जल निकासी, अपशिष्ट शोधन (ट्रीटमेंट) तथा प्रदूषण नियंत्रण के पुख्ता एवं स्थायी प्रबंध किए जाएं। और उन्हें जनता की जानकारी में लाया जाए
साथ ही, इस विषय पर आम नागरिकों को भी जागरूक होने की आवश्यकता है। अपने जनप्रतिनिधियों एवं जिम्मेदार अधिकारियों — जैसे विधायक, पार्षद, संबंधित विभागों के अधिकारियों तथा प्रशासन से इस विषय पर प्रश्न पूछिए और जवाब मांगिए।
यदि समय रहते इस विषय पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया गया, तो भविष्य में रतलाम की आम जनता को स्वच्छ पेयजल के लिए परेशान होना पड़ सकता है अथवा दूषित पानी पीने के कारण विभिन्न बीमारियों की चपेट में आने का खतरा भी बढ़ सकता है। जनहित में इस विषय पर अभी से गंभीर एवं ठोस कदम उठाना आवश्यक है। मात्र एक बोरडिया केमिकल ने बरसों तक उस क्षेत्र के भूमिगत जल को किस तरह बर्बाद किया है उस क्षेत्र के रहवासी भलीभांति जानते हैं इसलिए अभी से जागरूक हो जाए।

