खबर पक्की : 29 जून रतलाम,पूर्व के अनेक मामलों को देखते हुवे जनता की आशंका के अनुरूप एक बार फिर कांग्रेस की रैली को लेकर जिला प्रशासन ने पूरे शहर को बंधक बना दिया। शहर में एक जगह से दूसरी जगह जाने के लिए लोगों को कड़ी मशक्कत करना पड़ी। गांव से शहर आने वाले लोग भी बहुत परेशान हुए। सबसे ज्यादा परेशानी बीमार मरीजों को एक जगह से दूसरी जगह जाने में हुई। बैरिकेडिंग के कारण घंटों लोग परेशान हुए। शहर ने 50-50 हजार लोगों की रैलियां भी देखी है लेकिन कभी भी शहर को इस तरह बंधक नहीं बनाया गया जैसे कभी कमलेश डोडियार के ऐलान के बाद या कांग्रेस की रैली के एलान के बाद। पूरे शहर के ट्रैफिक को रैली के नाम पर इस तरह बाधित कर जनता को परेशानी और उलझन में डालना जिला प्रशासन की कार्यशैली और योग्यता पर सवाल खड़े करता है। कलेक्टर रतलाम मिशा सिंह के बारे में ज्यादातर जनप्रतिनिधि और पत्रकारों की राय है कि वह फोन अटेंड नहीं करती है और ना किसी मैसेज का जवाब देती है। जिला पंचायत अध्यक्ष लाला बाई से ना मिलने का मामला हो या विधायक चिंतामणि मालवीय का या करणी सेना के जीवन सिंह शेरपुर का या कमलेश डोडियार का हर मामले में उनका रवैया लचर रहा है। जिस कारण प्रशासन और सरकार की छवि जनता में खराब हुई है। कलेक्टर कोर्ट में आने वाले मुकदमों के बारे में भी अभीभाषक और पक्षकारो की राय है कि कलेक्टर की मुकदमों की सुनवाई और निराकरण में दिलचस्पी नहीं है हर बार तारीख ही मिलती है। यही हाल कलेक्टर के व्हाट्सएप पर प्राप्त मेसेज मैसेज बॉक्स में आने वाले मैसेज और जनसुनवाई में आने वाली शिकायतों का है ज्यादातर शिकायतों पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता है और वह अनदेखी के कारण अनिर्णय की शिकार हो जाती है। एक मामले के शिकायतकर्ता ने बताया कि उसने 17 नवंबर को कलेक्टर को मैसेज कर सर्वे नंबर बताते हुए शिकायत की थी कि रिंग रोड की एक जमीन की रजिस्ट्री आदिवासी से सामान्य व्यक्ति ने चार सौ बीसी करते हुए आदिवासी बनकर खरीदी थी रजिस्ट्री के आधार पर उस व्यक्ति का नाम और जाति आदिवासी दर्ज होना चाहिए था लेकिन बाद में जादू के जोर से वह जमीन बगैर किसी आदेश के खसरा मै से जाति भील हट जाती है और सामान्य हो जाती है। वह व्यक्ति रिंग रोड के अधिग्रहण में मुआवजा भी ले लेता है। यह सब बात कलेक्टर को मालूम होने के बाद भी कलेक्टर द्वारा किसी प्रकार की कोई कार्रवाई नहीं करना यह दर्शाता है कि उनकी कलेक्टरी में रुचि नहीं है। आम जनता अच्छी तरह जानती है कि कलेक्टर और एस पी के पास आने वाले ज्यादातर फोन आम जनता की सुविधाओं और शिकायतों से संबंधित होते हैं और जिम्मेदार लोगों के होते हैं। लेकिन जब कलेक्टर फोन ही नहीं अटेंड करेगी तो उनके पास शिकायत या सूचना पहुंचेगी कैसे। रतलाम जिला काफी संवेदनशील होकर दिल्ली और मुंबई का सेंटर है और तेजी से विकसित होता जिला है जहां तेज गति से निर्णय लेने वाला प्रशासनिक अधिकारी होना चाहिए। हो सकता है कलेक्टर की अपनी कुछ व्यक्तिगत या पारिवारिक समस्याएं हो लेकिन उन्हे अपनी कलेक्टरी पर हावी होने देकर वे तेजी से विकसित होते जिले और उसकी जनता के साथ अन्याय तो नहीं कर सकती। जनता जनप्रतिनिधियों और पत्रकारों की राय में कलेक्टर को दमदारी से कार्य कर जिले की जनता की अपेक्षाओ पर खरा उतरना चाहिए और विकसित होते जिले के विकास को नई ऊंचाई देना चाहिए।

