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जाने कहाँ गए वो दिन – स्पंदन

BySurendra Jain

Feb 5, 2025

खबर पक्की, 5 फरवरी, रतलाम। गायक मुकेश जी के जन्म के 101 वर्ष पूर्ण होने पर संस्था स्पंदन द्वारा स्थानीय गायत्री मल्टीपलेक्स ओडी 01 में द मुकेश नामक संगीतमय कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर नीमच ए.डी.एम. लक्ष्मी गामड़ ने कहा की स्पंदन सेवा और समर्थन के लगातार ऊंचे आयामो को छू रहा है। एडिशनल एसपी श्री राकेश खाखा जी ने कहा की संगीत के माध्यम से सेवा का ये भाव तारीफ के योग्य है।
कार्यक्रम अतिथियों द्वारा माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण के साथ प्रारम्भ हुआ। तत्पश्चात संस्था के सीनियर सदस्य स्व. श्री अश्विनी जोशी को श्रद्धांजलि अर्पित की गई, संस्था के संयोजक श्री अचल शुक्ला द्वारा संस्था के कार्यों पर प्रकाश डाला गया व सभी का स्वागत किया।
संगीत भरे इस कार्यक्रम में लक्ष्मी गामड़ (ए.डी.एम. नीमच), अय्यूब खान, संगीता जैन, नरेश यादव व अचल शुक्ला ने मुकेश जी के गाये हुए एक से बड़कर एक गीतों को प्रस्तुत कर संगीत का समां बांध दिया।
मनोज भावसार व बच्चों ने जाने कहाँ गाये वो दिन और जीना यहाँ मरना यहाँ गीतों में अपने नृत्य के माध्यम से उपस्थित लोगों का दिल जीत लिया।
इस अवसर पर डी.एस.पी. श्री अजय सारवान जी, किशोर पाटनवाला जी, एसडीओ सेतु निगम श्री सूर्यवंशी जी, समाजसेवी प्रवीण सोनी जी ने गीतों की प्रस्तुतियां दी और उपस्थित जन समूह ने गर्म जोशी से उनका स्वागत किया। इस अवसर पर देवास दृष्टिहीन कन्या केंद्र की टीम श्री बलजीत सिंह सलूजा जी के नेतृत्व में विशेष रूप से उपस्थित थी दृष्टिहीन बालिका सलोनी द्वारा सत्यम शिवम् सुंदरम गीत की प्रस्तुति दी। संस्था स्पंदन द्वारा सलूजा जी का सम्मान किया गया। नेशनल दृष्ठिहीन खिलाडिय़ों की कोच कृतिका चावरे का सम्मान संस्था द्वारा किया गया।
इस अवसर पर स्पंदन संस्था के सभी सदस्यों का स्पंदन संयोजक श्री अचल शुक्ला द्वारा स्वागत किया गया और बताया कि टीम पिछले 15 दिनों से इस कार्यक्रम को सफल बनाने में अथक परिश्रम कर रही थी।
इस अवसर पर रतलाम के संगीतप्रेमी श्रोताओं के साथ गणमान्य नागरिक उपस्थित थे तथा नागरिकों द्वारा प्राप्त धनराशि देवास दृष्ठिहीन कन्या केंद्र को दी गई। संस्था के सरंक्षक श्री नितिन तिवारी जी ने आभार व्यक्त करते हुए कहा की संस्था सभी के सहयोग से निरंतर आगे बढ़ रही है। कार्यक्रम का शानदार संचालक कविताओं के माध्यम से गीतकार अलक्षेन्द्र व्यास ने किया।

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