रतलाम। पश्चिम रेलवे के रतलाम मंडल रेल चिकित्सालय में लोकल परचेज के नाम पर बड़ा घोटाला चल रहा है और मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। घोटाला इस प्रकार पकड़ में आया की 27 मई को एक महिला मरीज दिमाग़ी लक़वे का शिकार होकर महिला वार्ड में भर्ती हुई थी। जिसका ईलाज डॉ. अविनाश चन्द्र द्वारा किया गया। 30 मई को छुट्टी उपरांत महिला को जो दवाई लिख कर दी गई थी वह छह प्रकार की दवाई थी जिसमें से 5 प्रकार की दवाई महिला के पूर्व से हार्ट पेशेंट होने से चल रही थी जब सेवानिवृत्त कर्मचारियों के काउंटर से उक्त दवाइयां पेशेंट के बेटे को दी गई तो सिर्फ पूर्व में चल रही 5 दवाइयों को ही काउंटर से दिया गया मरीज के बेटे ने पूछा की सब दवाई हो गई तो कहा गया की हा सब दवाई दे दी है। जबकि सबसे महंगी और दिमागी लक़वे की महत्वपूर्ण दवा city nova जो इप्का लेब कम्पनी की होकर 473 रुपये 10 गोली है नही दी गई जो मरीज को सुबह शाम एक महीने लेना थी इस प्रकार 60 गोली 2838 रु की गोली मरीज के परिजन को नही दी। जब घर पहुँच कर मरीज के परिजन ने देखा की सबसे महत्वपूर्ण दवाई तो इसमें है ही नही तब अगले दिन उसने शिकायत की तो कहा गया की हमने तो दवाई पूरी दी है जब वह अड़ गया तो उसे दवाई दी गई जिसपर इंडियन रेलवे नॉट फ़ॉर सेल का स्टिकर चिपका था जिसको कोई भी निकाल कर आसानी से उस दवाई को बाजार में बेच सकता है। इस संदर्भ में स्थानीय दवा आपूर्ति कर्ताओ से पता चला की कई महंगी दवाई जो डॉक्टर द्वारा लिखी जाती है उसके बिल तो बनवाये जाते भुगतान भी होता है किंतु माल आपूर्ति किये बगैर वह रकम सब मे बंट जाती है इस प्रकार तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कम पढे लिखे कर्मचारियों को लिखी गई महंगी दवाई उन्हें नही देकर उनकी जान के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है और साथ ही उनकी आड़ में जम कर पैसा कुटा जा रहा है क्या रेलवे का सतर्कता विभाग सो रहा है।
