खबर पक्की, 1 मई, रतलाम। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग जिला रतलाम के अध्यक्ष मुकेश कुमार तिवारी एवं सदस्य श्रीमती जयमाला संघवी द्वारा दो प्रकरणों में आदेश पारित करते हुए परिवादी 1 सुनील पाल एवं 2 श्रीमती ममता पाल को बीमा राशि रुपए एक – एक लाख का भुगतान 6 प्रतिशत साधारण वार्षिक ब्याज मानसिक त्रास हेतु क्षतिपूर्ति रुपए 5000 -5000 एवं वाद व्यय 2000 -2000 अदा करने के आदेश प्रदान किया। उक्त राशि साठ दिवस में अदना न करने पर 8 प्रतिशत की दर से समस्त राशि अदा करना होगी।
परिवादी सुनील पाल एवं ममता पाल की ओर से अभिभाषक सुनील पारिख द्वारा अनावेदक स्टार हेल्थ एंड एलाइड इंश्योरेंस कंपनी के विरुद्ध परिवाद प्रस्तुत कर बताया था कि अनावेदक ने आवेदक को कोविड रक्षक बीमा पॉलिसी के तहत बीमा किया था। आवेदकगण द्वारा स्वास्थ्य खराब होने पर व जांच में कोरोना पॉजिटिव पाए जाने पर शासकीय मेडिकल कॉलेज रतलाम में भर्ती किया गया। जहां समस्त जांच की गई व कोरोना पॉजिटिव होने पर इलाज किया गया जिसकी सूचना बीमा कंपनी को दी गई। बीमा कंपनी ने बीमा दावा यह कहते हुए खारिज कर दिया कि आवेदकगण का ऑक्सीजन लेवल, रेस्पेरेटरी रेट, पल्स रेट, ब्लड प्रेशर आदि सभी सामान्य था आवेदकगण जानबूझकर भर्ती हुए इसके अतिरिक्त आवेदन के शासकीय अस्पताल में भर्ती हुए जो निशुल्क उपचार प्रदान करता है इस कारण कोई भी सहायता पाने का आवेदक पत्र नहीं है।
माननीय जिला उपभोक्ता फोरम ने कोविड गाइडलाइन के अवलोकन व प्रस्तुत दस्तावेजों तथा परिवादी एडवोकेट पारिख के तर्कों से सहमत होते हुए पाया कि उपचार करने वाले मेडिकल ऑफिसर की सलाह पर कोरोना पॉजिटिव पेशेंट का अस्पताल में भारती रहकर उपचार किया जा सकता है, भले ही मरीज एम्स प्रोटोकॉल के अंतर्गत ए श्रेणी में आता हो और उसे माइल्ड इन्फेक्शन हो, जिसके आधार पर जिला आयोग ने पाया कि बीमा राशि प्राप्त करने हेतु अपेक्षित शर्तों का वर्णित मापदंडों को पूरा किया है परंतु विपक्षी बीमा कंपनी ने उपरोक्त दस्तावेजों का इस तरह से निर्वाचन किया जिससे वह परिवादी को बीमा पॉलिसी के अधीन बीमा राशि को भुगतान करने के अपने दायित्व से बच सके विपक्षी बीमा कंपनी ने परिवादी को बीमा पॉलिसी की राशि को भुगतान न करके एवं आवेदक के बीमा दावे को बिना किसी न्यायोचित उचित कारण के निरस्त कर सेवा में कमी की है जिसके परिणाम स्वरूप आवेदक उपरोक्त राशि पाने का पात्र है। आवेदकगण की ओर से अभिभाषक सुनील पारिख द्वारा पैरवी की गई।

