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राजनीतिक दलों द्वारा दिया जाने वाला प्रलोभन चुनाव आयोग की नजर में आचार संहिता का उल्लंघन नहीं?

BySurendra Jain

Oct 31, 2023

  • भारत निर्वाचन आयोग द्वारा जारी आचार संहिता में नकद राशि की सीमा जो कि 50 हजार है वर्तमान में आम जनता के लिए इसे बढाई जाकर वर्तमान समय के हिसाब से 5 लाख तक किए जाने की आवश्यकता है एवं व्यापारी वर्ग द्वारा बिल से लाए जाने वाले माल को जब्ती से मुक्त किए जाने की आवश्यकता है
    खबर पक्की, 31 अक्टूबर, रतलाम। एडवोकेट कमल पाटनी ने बताया कि उनके द्वारा भारत निर्वाचन आयोग को वर्ष 2019 में पत्र लिखकर निर्वाचन को स्वतंत्र एवं निष्पक्ष कराने के संबंध में एवं राजनैतिक दलों द्वारा आम जनता को भ्रमित कर दिए जाने वाले प्रलोभनों पर रोक लगाने के संबंध में शिकायत की गई थी।
    चुनाव आयोग द्वारा मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी मध्यप्रदेश को पत्र क्रमांक 61/म.प्र.-लोस/2019/650 दिनांक 25-4-2019 के द्वारा कार्रवाई करने हेतु निर्देशित किया गया था, मगर उप मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी म.प्र भोपाल द्वारा पुन: अवर सचिव भारत निर्वाचन आयोग नई दिल्ली को पत्र क्रमांक 23/4/2019/विविध 7353 दिनांक 4-4-2019 के द्वारा अपने कार्यक्षेत्र का नहीं होकर पुन: भारत निर्वाचन आयोग को उनके विचार क्षेत्र का बताकर संलग्न दस्तावेज सहित प्रेषित कर दिया था। मगर आज 4 वर्ष एवं 6 माह स से अधिक का समय व्यतीत होने के बाद भी भारत निर्वाचन आयोग द्वारा राजनैतिक दलों पर नकेल नहीं कसकर चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन नहीं मानकर राजनीतिक दलों को नित नए प्रलोभन आम जनता को देकर चुनाव को प्रभावित किया जा रहा है। या यह मान लिया जाए कि राजनैतिक दलों के द्वारा की जाने वाली कार्रवाई को भारत निर्वाचन आयोग द्वारा वैधानिक मान लिया गया है एवं आम जनता को भ्रमित करने का लाइसेंस प्रदान कर दिया गया है। यहां यह उल्लेखनीय है कि चुनाव आचार संहिता के पालन में आम जनता एव ं व्यापारी को परेशान करने के लिए भी पुलिस प्रशासन एवं जिला प्रशासन को खुली छूट दे दी गई है जिससे आम जनता त्राहि-त्राहि कर रही है। इस बारे में हाल ही में जनप्रतिनिधियों के द्वारा भी प्रदेश चुनाव प्रभारी श्री भूपेन्द्रसिंह को पत्र द्वारा जानकारी दी गई है एवं आम जनता एवं व्यापारी को राहत दिए जाने की मांग की है।

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