खबर पक्की, 27 अक्टूबर, रतलाम । रणजीत विलास पैलेस स्थित सूरजपोल की भूमि जो कि जिला प्रशासन एवं नगर निगम प्रशासन द्वारा शासकीय घोषित की जा रही थी एवं भूखंडधारियों को अनावश्यक रूप से पिछले 40 वर्षों से प्रताडि़त किया जा रहा था के संबंध में माननीय न्यायालय के द्वारा पुन: एक महत्वपूर्ण फैसला दिया गया है जो कि भूखंडधारियों के लिए राहत प्रदान करने के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पडाव है। उक्त समस्त सूरजपोल क्षेत्र के भूखंड एवं जैन गृह निर्माण सहकारी समिति की भूमि जो कि रतलाम महाराजा द्वारा दिनांक 22 जून 1976 को रजिस्टर्ड विक्रय पत्र से समिति को विक्रय की गई थी। (मप्र शासन राजस्व विभाग मंत्रालय द्वारा पत्र क्रमांक स्न 12-24/99/7-9 भोपाल दिनांक 3 फरवरी 2001 द्वारा) कलेक्टर जिला रतलाम मप्र के पत्र क्रमांक 90104/भूअर्जन /2000 दिनांक 22-11-2000 के संदर्भ में कलेक्टर के प्रस्ताव से सहमत होते हुए शासन द्वारा यह निर्णय लिया गया कि रतलाम रियासत के भूतपूर्व महाराजा की सम्पत्ति का अधिग्रहण (भू-अर्जन) की कार्रवाई न की जाए। मगर तत्कालीन कलेक्टर रतलाम द्वारा जिला योजना समिति रतलाम की बैठक दिनांक 1-10-2003 के निर्णय से सूरजपोल परिसर स्थित भूमि एवं जैन गृह निर्माण समिति को विक्रय की गई भूमि को अवैध रूप से सर्वे नं. 634 (आबादी) की उक्त भूमि को शासकीय भूमि मानकर राजनीतिक दबाव में 7313.57 वर्गमीटर भूमि जो कि रतलाम महाराजा द्वारा वर्ष 1985 के पूर्व ही निजी सम्पत्ति के रूप में भूखंडधारियों को विक्रय कर दी थी। विक्रय की गई निजी भूमि को बगैर अधिग्रहण की कार्यवाही एवं बिना प्रीमियम / भूभाटक के जिला शिक्षा अधिकारी शिक्षा विभाग के लिए उप संचालक लोक शिक्षा जिला रतलाम द्वारा उक्त भूमि के लिए आवेदन भी 2-6-99 (पूर्व से ही विक्रित निजी भूमि के बारे में ) को दिया था। तत्पश्चात तत्कालीन कलेक्टर महोदय द्वारा सारे नियमों को ताक में रखकर अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर समस्त भू्खंडधारियों एवं जैन गृह निर्माण सहकारी समिति के विरोध के बावजूद हठधर्मितापूर्वक समस्त भूमि को मप्र शासन के निर्देशों की अवहेलना करते हुए शिक्षा विभाग को अवैध रूप से देते हुए कब्जा कराकर कथित रूप से आधिपत्य भी देकर निजी भूखंडों पर अवैध रूप से अतिक्रमण कराते हुए बगैर नगर निगम की भवन निर्माण की अनुुमति एवं नगर एवं ग्राम निवेश के अनुमोदन के बगैर के उक्त भूमि के कुछ हिस्से पर भवन निर्मित करा दिया गया था। उपरोक्त समस्त जानकारी भूखंडधारियों द्वारा समस्त विभाग से अनेक बार मांगी गई है। मगर समस्त विभागों द्वारा कोई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है। उक्त प्रकरण में वादी की ओर से अधिवक्ता श्री ब्रजेश शर्मा एवं प्रतिवादी शासन की ओर से श्री सतीश त्रिपाठी ने पैरवी की।

