खबर पक्की :21 अप्रैल रतलाम, रतलाम विधायक के प्रखर विरोधी अशोक पोरवाल को रतलाम विकास प्राधिकरण का अध्यक्ष बनाए जाने के बाद भाजपा संगठन में लगता है एक दूसरे को निपटाने का खेल शुरू हो गया है। बताया जाता है कि अशोक पोरवाल को रतलाम विकास प्राधिकरण का अध्यक्ष बनाए जाने के पूर्व रतलाम भाजपा का अध्यक्ष बनाए जाने की कवायद चल रही थी। और खुद अशोक पोरवाल भी रतलाम भाजपा जिला अध्यक्ष का पद लेने के इच्छुक थे किंतु रतलाम विधायक के विरोध को देखते हुए इन्हें अध्यक्ष नहीं बनाया गया। किंतु महापौर चुनाव के वक्त भी विधायक के कारण नाम कट जाने और फिर पुनः भाजपा जिला अध्यक्ष पद पर विधायक के विरोध को देखते हुए इन्हें उक्त पद तो नहीं दिया गया। लेकिन लगता है विधायक के तू डाल डाल मैं पात पात के खेल से खिन्न संगठन ने लगता है इस बार उनके विरोध को देखते हुए अशोक पोरवाल को जिला अध्यक्ष ना बनाते हुए उससे बड़ी लकीर खींचते हुए रतलाम विकास प्राधिकरण का अध्यक्ष बना दिया और कैबिनेट मंत्री का दर्जा भी दे दिया। भाजपा जिला अध्यक्ष संगठन का पद है वही रतलाम विकास प्राधिकरण का अध्यक्ष सरकार का पद है जिसमें पद और प्रतिष्ठा के साथ अन्य सारी सुविधाएं की सरकार द्वारा प्रदान की जाती है। बताया जाता है कि खुद मुख्यमंत्री ने उन्हें भाजपा जिलाध्यक्ष के लिए जिद ना करते हुए उन्हें यह पद लेने के लिए कहा बताया जाता है कि इसके लिए अमित शाह के दफ्तर से भी फोन आया था। लेकिन अध्यक्ष बनाए जाने की घोषणा के साथ ही संगठन में उनके विरोधियों द्वारा उनको निपटाने के लिए उनका किसी महिला के साथ बात करते हुए audio वायरल कर दिया गया। हालांकि उनके द्वारा उस ऑडियो क्लिप को को डॉक्टरेट अर्थात काट काट के बनाया गया फर्जी ऑडियो बताया गया है। इस संदर्भ में भोपाल भाजपा संगठन के सूत्रों ने बताया कि उक्त ऑडियो क्लिप तो उनके पास महापौर चुनाव के वक्त से ही है जो उसके टिकट का विरोध करने के लिए उनके विरोधियों द्वारा भेजा गया था। पर उस वक्त उस ऑडियो क्लिप को वायरल नहीं किया गया था। पर अभी अचानक उनको रतलाम विकास प्राधिकरण का अध्यक्ष बना दिए जाने के कारण और उसके बाद उक्त ऑडियो क्लिप का वायरल होना संगठन के उच्च स्तर पर हजम नहीं हो रहा है और यह माना जा रहा है की रतलाम भाजपा संगठन एक दूसरे को निपटाने की कवायद में लगा हुआ है। और इसकी वजह से मध्य प्रदेश की सबसे सुरक्षित माने जाने वाली रतलाम सीट खतरे में आ सकती है। यहां यह भी दिलचस्प है कि जिस महिला से बातचीत का ऑडियो क्लिप वायरल हुआ है उक्त ऑडियो क्लिप एवं महिला द्वारा वायरल ना करते हुए किसी और के द्वारा किया गया है जिससे ऑडियो क्लिप की संदिग्धता स्वयं ही पैदा हो जाती है। अब देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा संगठन इस पूरे मामले को कितनी गंभीरता से लेकर मामले की तह तक जाकर जिम्मेदारों पर कार्रवाई करता है। या आने वाले दिनों में इस तरह की निपटाने की कवायद में और भी संगठन की छीछालेदर होती है।

