खबर पक्की :11 अप्रैल, मुख्यमंत्री तो दौरा कर के चले गए लेकिन इस दौरे के दौरान जो कुछ घटित हुआ वह सब धीरे-धीरे सामने आ रहा है। हुआ यूं कि मुख्यमंत्री के रतलाम दौरे को लेकर वरिष्ठ भाजपा नेता हिम्मत कोठारी को सम्मान पूर्वक निमंत्रण नहीं मिला था। इसको लेकर 1 दिन पूर्व पहुंचे प्रभारी मंत्री ओमप्रकाश भदोरिया को हिम्मत कोठारी ने फोन लगाया और उन्हें खरी-खोटी सुनाई और बताया कि मैं कितने जिलों में प्रभारी मंत्री रहा हूं प्रभारी मंत्री का प्रोटोकाल क्या कहता है हिम्मत जी के रुख से भयभीत भदोरिया ने सीधे मुख्यमंत्री को फोन लगाकर जानकारी दी की हिम्मत जी बहुत नाराज है और कहीं कुछ बड़ा ड्रामा ना हो जाए इसलिए मुख्यमंत्री ने सीधे कलेक्टर को फोन लगाकर हिम्मत जी के यहां जाकर उन्हें निमंत्रण देने के लिए कहा। बताया जाता है कि 7 तारीख को रात को कलेक्टर हिम्मत जी के यहां पहुंचे और उनसे मुख्यमंत्री के सभी कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए आग्रह किया। इसके बाद हिम्मत जी मुख्यमंत्री के सभी कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए तैयार हुए। मुख्यमंत्री के दौरे में शामिल सभी कार्यक्रमों में अव्यवस्था दिखाई दी पत्रकार और फोटोग्राफर को हेलीपैड पर जाने के लिए पास नहीं दिए गए इसी प्रकार मुख्य कार्यक्रम स्टेडियम में आयोजित था उसका भी औपचारिक निमंत्रण व्हाट्सएप पर भेज कर इतिश्री कर ली, वहां स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम में पत्रकारों की जगह पर भाजपा की महिला नेत्रीयो ने कब्जा कर लिया और पत्रकार जब विरोध जताते हुए बाहर जाने लगे तो डिप्टी कलेक्टर अनिल भाना, आलोट के भाजपा नेता नंदन जैन रतलाम के प्रदीप उपाध्याय आदि ने उन्हें मनाकर और महिला नेत्रीओ से अनुनय विनय कर उन्हें पत्रकारों की जगह खाली करने के लिए मनाया। तब जाकर पत्रकार बैठ सके। इसी प्रकार प्रबुद्ध जनों के कार्यक्रमों में 90 प्रतिशत उन लोगों को बुलाया गया जो ऑलरेडी भाजपा से जुड़े हुए हैं जबकि पार्टी पॉलिटिक्स से ऊपर उठकर जिले के सभी प्रबुद्ध जनों को बुलाया जाना था। आदिवासी बाहुल्य जिला होने के बावजूद आदिवासी भाजपा नेताओं के अलावा एक भी आदिवासी नेता को इन कार्यक्रमों में नहीं बुलाएगा। राष्ट्रवाद और सैनिकों के सम्मान की बात करने वाले भाजपा संगठन में सैनिकों का कितना सम्मान है और वह उन्हें प्रबुद्ध जन गिनती है या नहीं इस बात से साबित होता है कि जिले में 200 के लगभग सैनिक है जिसमें से कई ने 62,71 और कारगिल युद्ध में हिस्सा लिया लेकिन एक भी सैनिक को प्रबुद्ध जनों के कार्यक्रम में नहीं बुलाया था और तो और कारगिल युद्ध में भाग लेने वाले और आरएसएस से जुड़े तथा मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़ के आदिवासी जनजाति सुरक्षा मंच के प्रमुख कैलाश निनामा जिन्होंने डीलिस्टिंग के मामले को लेकर मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में आदिवासियों की 50000 लोगो तक की रैली आयोजित की उन्हें भी इस लायक नहीं समझा गया। इसकी भी आदिवासी समुदाय में बड़ी चर्चा रही। यही कारण रहा कि चुनाव के मद्देनजर आयोजित इस कार्यक्रम में भाजपा और उसके अनुषंगी संगठनों से जुड़े लोगों को तवज्जो ना देना संगठन की सबसे बड़ी कमजोरी रही। 40 सालों से स्वदेश अखबार से जुड़े वरिष्ठ पत्रकार शरद जोशी जो कि भाजपा मे विभिन्न पदों पर रहे हैं उन्हें भी किसी भी कार्यक्रम का निमंत्रण पत्र नहीं दिया गया यही कारण रहा कि वे किसी भी कार्यक्रम में दिखाई नहीं दिए और नहीं आने का कारण उन्होंने यही बताया कि जब निमंत्रण नहीं है तो जाकर क्या करें। बहर हाल भाजपा को अगर 2023 में अपने प्रदर्शन को सुधारना है तो इन सब बातों की समीक्षा कर गलतियों को सुधारना होगा।

