खबर पक्की: 6 अक्टूबर रतलाम, सैलाना और जावरा जैसी जगह में शानदार आतिशबाजी के साथ 1 मिनट में पूरे सम्मान के साथ रावण का दहन हो गया लेकिन प्रदेश के सबसे साक्षर नगर रतलाम और इतनी बड़ी नगर निगम इतना बड़ा अमला दर्जनों जनप्रतिनिधि होने के बावजूद महापौर विधायक निगमायुक्त और जिला प्रशासन के तमाम अमले के सामने जिस प्रकार रावण का अपमान हुआ और भगवान राम की गरिमा कम हुई ऐसे दुर्लभ ही उद्धरण मिलते हैं। जब जनप्रतिनिधि और अधिकारी व कर्मचारी काम कम और प्रचार ज्यादा पर अपना पूरा ध्यान लगा देते हैं तो वहां ऐसा ही होता है फिर चाहे वह मामला स्वच्छता की रैंकिंग का हो या रावण दहन का। यही कारण है कि स्वच्छता की रैंकिंग के लिए होरडिंग बैनर का सिर्फ टेंडर 4000000 का निकाला गया है जबकि हर कोई जानता है कि होरड़िग बैनर लगाने से स्वच्छता की रैंकिंग नहीं आ सकती पर क्या किया जा सकता है अंधा बांटे रेवड़ी अपने अपने को दे के तर्ज पर हर कोई आंखें मूंदे हुए है। हां तो हम बात कर रहे थे रावण दहन में रावण के अपमान और राम जी की गरिमा कम करने की विधायक सभागृह में हुए रावण दहन में भी रावण दहन के दौरान बहुत दिक्कत आई और बड़ी मुश्किल से रावण जल पाया यही हाल नेहरू स्टेडियम वाले मुख्य रावण दहन मैं हुआ 8:00 बजे का समय था पर पर 9:30 बजे बाद रावण दहन प्रारंभ हुआ जो 10:30 बजे तक पूर्ण नहीं हो पाया। लंका भी बहुत मुश्किल से जल पाई। रावण दहन में राम जी का जलता हुआ बाण नाभि में लगता है और रावण की मौत होती है दुनिया जानती है। पहले तो फिल्मी कैरेक्टर पुष्पा के तर्ज पर एक तरफ झुके हुए रावण का निर्माण करवाया गया जो एक तरह से प्रकांड पंडित रावण का अपमान है फिर रावण के दाहिने पैर को जलाने की कोशिश की गई बहुत कोशिशों के बाद भी रावण आग नहीं पकड़ पाया फिर रावण के बाएं पैर को जलाने की कोशिश की गई बहुत मुश्किलों से बाया पैर जल पाया लेकिन रावण फिर भी बच गया और आपको यह बता दे कि राम ने रावण को नहीं मारा जो सबसे बड़ा अपमान है रावण का। रावण को जलाने के लिए नगर निगम के कर्मचारी और पुलिस वाले मशक्कत करते रहे जब हर कोई ना कामयाब हो गया तो एक पुलिस वाले ने लंबा डंडा लेकर कपड़ा लपेटकर उसमें आग लगाकर रावण के पिछवाड़े में आग लगाई जो आपको खबर के साथ दिए गए फोटो में स्पष्ट दिख रहा है। रावण की पूरी जिंदगी में रावण का ऐसा अपमान नहीं हुआ होगा सीने में राम जी का तीर खाकर गरिमामय दहन की जगह इस बुरी तरह दुर्गति युक्त दहन की तो कभी कल्पना ना तो राम ने की होगी ना रावण ने ना कभी जनता ने की होगी वह भी उस निगम परिषद से उस पार्टी के कार्यकाल में जो दिन रात हिंदू संस्कृति और राम की दुहाई देती है। इस पूरे प्रकरण के बाद जब जनता नेहरू स्टेडियम से निकल रही थी अनेक लोगों का यह कहना था की बुराई के प्रतीक रावण का जब यह दहन नहीं कर पाए तो बुराई का भ्रष्टाचार का खात्मा कैसे करेंगे रामजी इन्हें सद्बुद्धि दे।

