खबर पक्की, 16 जुलाई, रतलाम। जिले में 0 से 5 वर्ष की आयु के बच्चों में शिशु एवं बाल मृत्यु दर कम करने के लिए दस्तक अभियान अंतर्गत आशा, एएनएम, आंगनवाडी कार्यकर्ता द्वारा घर-घर भ्रमण कर 18 जुलाई से 31 अगस्त तक स्वास्थ्य एवं परामर्श सेवाऐं प्रदान की जाएंगी। दस्तक अभियान के दौरान शिशु मृत्यु दर एवं बाल मृत्यु में कमी लाने के लिए गतिविधियां की जाऐंगी। कलेक्टर नरेन्द्र सूयवंशी, सीईओ जिला पंचायत श्रीमति जमुना भिडे, सीएमएचओ डॉ. ननावरे, जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास विभाग रजनीश सिन्हा, सहायक संचालक सुश्री अंकिता पंडया, डीईओ के. सी. शर्मा, जिला आयुष अधिकारी डॉ. बलराज चौहान, डीआईओ डॉ. वर्षा कुरील, डीएचओ डॉ. गौड, डीपीएम डॉ. अजहर अली आदि की उपस्थिति में जिला स्तरीय टास्क फोर्स की बैठक संपन्न की गई ।
कार्यशाला के दौरान कलेक्टर नरेन्द्र सूर्यवंशी ने निर्देशित किया कि विभागीय अधिकारी, कर्मचारी समन्वित प्रयास कर कुपोषित बच्चों को आवश्यक संदर्भ सेवाऐं प्रदान करें। उन्होंने कार्यक्रम की मॉनिटरिंग के लिए अन्य विभागीय अधिकारियों के माध्यम से सूपरवीजन एवं मॉनिटरिंग कराने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि कार्यक्रम हेतु सभी आवश्यक पूर्व तैयारियां करते हुए संसाधनों की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. वर्षा कुरील ने बताया कि दस्तक अभियान के दौरान बाल्यकालीन बीमारियों की पहचान एवं प्रबंधन पर बल दिया जाएगा ताकि बाल मृत्यु दर में कमी लाई जा सके। प्रमुख गतिविधियों के अंतर्गत समुदाय में बीमार नवजातों और बच्चों की पहचान प्रबंधन और रेफरल, 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों में शैशव और बाल्यकालीन निमोनिया की त्वरित पहचान प्रबंधन और रेफरल, 5 वर्ष से कम उम्र के गंभीर कुपोषित बच्चों की सक्रिय पहचान प्रबंधन और रेफरल, 6 माह से 5 वर्ष के बच्चों में गंभीर अनीमिया की सक्रिय स्क्रीनिंग एवं प्रबंधन, 9 माह से 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों को विटामिन ए अनुपूरण, बाल्यकालीन दस्त रोग की पहचान एवं नियंत्रण हेतु ओआरएस एवं जिंक संबधी सामुदायिक जागरूकता एवं प्रत्येक घर में ओआरएस पहुचाना, बच्चों में दिखाई देने वाली जन्मजात विकृतियों एवं वृद्वि विलंब की पहचान, समुचित शिशु एवं बाल आहर पूर्ति (स्तनपान व्यवहार) संबंधी समझाईश समुदाय को देना, एसएनसीयू एवं एनआरसी से छुटटी प्राप्त बच्चों में बीमारी की स्क्रीनिंग एवं फालोअप को प्रोत्साहन, गृह भेंट के दौरान आंशिक रूप से टीकाकृत एवं छूटे हुए बच्चों की टीकाकरण स्थिति की जानकारी लेना आदि मुख्य हैं।

