खबर पक्की : 3 जुलाई रतलाम, कल पंडित शिव शक्ति लाल शर्मा आयुर्वैदिक कॉलेज रतलाम के छात्र संदीप पिता अशोक परमार निवासी शुजालपुर द्वारा पुखराज रेजिडेंसी रतलाम स्थित अपने कमरे में आत्महत्या कर ली गई थी। संदीप मध्य प्रदेश के शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार के छोटे भाई अशोक का लड़का होकर उनका भतीजा था। वह 4 वर्षों से किसी लड़की के साथ रिलेशनशिप में था और पिछले 5 महीनों से दोनों अलग अलग हो गए थे। शायद अलग होने के दुख से ही व अत्यधिक डिप्रेशन में चला गया और उसने आत्महत्या का रास्ता चुना। आत्महत्या करने से पहले उसने अपने सुसाइड नोट में अपने माता-पिता से माफी मांगते हुए उक्त सारी चीजों का खुलासा किया साथ ही अपने अंकल इंदर सिंह परमार द्वारा की गई मदद की भी खूब तारीफ की। और यह भी इच्छा व्यक्त की कि उसका अंतिम संस्कार उसके खुद के घर ना करते हुए उसके मामा के यहां किया जाए क्योंकि उसकी मां यह दुख सहन नहीं कर पाएगी। और उसने यह भी लिखा कि लड़की को कुछ नहीं कहा जाए यह सब वह अपनी इच्छा से और जीवन से निराश होकर कर रहा है। पर उसकी किताबों में एक और अन्य पत्र जो फीस के संदर्भ में उसने और उसके दोस्तों ने पूर्व में लिखा था और जो रतलाम एसपी और विधायक और कलेक्टर को भी दिया था। और उसी पत्र को लेकर परिजन यह आशंका व्यक्त कर रहे थे के शायद आत्महत्या की वजह यह हो पर चुकी ऐन मृत्यु के पहले जो सुसाइड नोट लिखा गया है उसमें उसने स्पष्ट तौर पर जीवन से निराश होने की और जीने की इच्छा खत्म होने की बात लिखी है और साथ ही माफी भी मांगी है परिवार जनों से और लडकी को कुछ न कहने की हिदायत भी दी है इससे प्रथम दृष्टया प्रेम प्रसंग में विफल होने से आत्महत्या की ओर विमुख होने का साफ इशारा करता है। पर चूंकि उक्त कालेज में 2 प्रकरण पूर्व में भी इस तरह के हो चुके हैं तो नि:संदेह प्रथम दृष्टया उंगली कॉलेज प्रबंधन की ओर ही उठना थी और उठी पर जहां तक इस प्रकरण का सवाल है इस प्रकरण में ऐसा स्पष्ट तौर पर प्रतीत हो रहा है कि कॉलेज प्रबंधन का कोई रोल नहीं है। बहरहाल इस पूरे घटना से कालेज प्रबंधन और उसके करता देवताओं को भी सीख लेना चाहिए कि वे अपने प्रबंधन को और पुख्ता और मानवीय और संवेदनशील बनाए ताकि इस प्रकार की घटनाओं पर उन पर कोई उंगली ना उठा सके और हर छात्र गवाही में उनके लिए तैयार खड़ा रहे कि नहीं ऐसा नहीं है। क्योंकि कॉलेज के साथ-साथ रतलाम की प्रतिष्ठा भी जुड़ी है।

